जांजगीर चांपा जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल पर प्रताड़ना का आरोप लगा है। अस्पताल के 83 डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है और सामूहिक अवकाश पर चले गए है। इससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। पिछले तीन महीनों से अस्पताल में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ का आरोप है कि नव पदस्थ सिविल सर्जन उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं। इस मुद्दे पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से स्टाफ ने आंदोलन तेज कर दिया है। मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल रहा स्टाफ ने चेतावनी दी है कि अगर सिविल सर्जन को नहीं हटाया गया तो 11 अप्रैल को शहरी और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के कर्मचारी भी सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे। आंदोलन के दौरान सिविल सर्जन ने कुछ ब्लॉक स्तर के डॉक्टरों की मदद से ओपीडी चलाने की कोशिश की। फिर भी मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बावजूद स्थिति में सुधार न होने से स्टाफ का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इस विवाद का असर पूरी प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने की आशंका है। बता दें कि स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद रायपुर से तीन सदस्यीय जांच टीम पहुंची थी। स्वास्थ्य सेवा निदेशालय की जांच टीम ने दोनों पक्षों के बयान भी दर्ज किए थे। बावजूद इसके इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। …………………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… जांजगीर-चांपा जिला अस्पताल में डॉक्टरों का विरोध जारी:सिविल सर्जन के खिलाफ रायपुर से पहुंची जांच टीम, तीसरी बार दर्ज किए बयान जांजगीर-चांपा जिला अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद रायपुर से तीन सदस्यीय जांच टीम पहुंची है। मामला 5 मार्च का है, जब एक सीनियर नर्स ने सिविल सर्जन पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। इसके बाद अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने भी मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से शिकायत की। कलेक्टर ने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया। पढ़ें पूरी खबर…


