जिंदल की खदानों से नाले दूषित, साढ़े तीन लाख का जुर्माना

भास्कर न्यूज | धौराभाठा जिले के तमनार क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों से उपजा पर्यावरण संकट अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर जिंदल पावर लिमिटेड (जेपीएल) की कोयला खदानों से निकल रहे दूषित पानी ने प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषित किया, तो दूसरी ओर इसी क्षेत्र के गांवों में लोग जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सड़कों पर हैं। ताजा मामला गारे पेलमा कोयला खदान 4/2 और 4/3 का है। यहां बिना साफ किए गंदा पानी सरसमाल गांव के नाले में छोड़ा जा रहा था। शिकायत पर पर्यावरण संरक्षण मंडल की टीम ने मौके पर जांच की। निरीक्षण में पाया गया कि खदान के भीतर भरा दूषित पानी ग्रीनलैंड ड्रेन के जरिए सीधे नाले में मिल रहा था। इसके अलावा कोल हैंडलिंग प्लांट से भी गंदा पानी खदान परिसर के बाहर छोड़ा जा रहा था, जो पर्यावरणीय शर्तों का उल्लंघन है। प्रदूषण और अनियमितताओं के खिलाफ तमनार में जनआंदोलन तेज होता जा रहा है। ग्राम लिबरा के सीएसपी चौक पर गारे पेलमा सेक्टर-1 कोयला खदान की धौराभाठा में नियम विरुद्ध जनसुनवाई के विरोध में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह 13वें दिन भी जारी है। आंदोलन में कोयला प्रभावित क्षेत्र के 30 से अधिक गांवों के मजदूर, किसान, महिलाएं, युवा बड़ी संख्या में शामिल हैं। धरना स्थल पर ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे किसी भी कीमत पर जल, जंगल और जमीन नहीं देंगे। उनके मुताबिक जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण ने सामान्य जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। यह पहला मौका नहीं है जब जेपीएल की खदानें पर्यावरणीय लापरवाही के आरोपों में घिरी हों। गारे पेलमा 4/6 माइंस में वायु प्रदूषण की शिकायत पर निरीक्षण में कोयला स्टॉक में आग पाई गई थी, जिससे जहरीली गैसें और धुआं फैल रहा था। उस समय 4.50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। गारे पेलमा 4/1 में कोयला परिवहन के दौरान वाहनों पर तिरपाल ठीक से न ढंके होने से सड़क पर कोयला गिरने की शिकायत पर 1.50 लाख का जुर्माना लगाया जा चुका है। नियमों के मुताबिक खदान का पानी साफ करके ही छोड़ा जाना चाहिए, लेकिन यहां लापरवाही बरती गई। शुरुआती तौर पर इसकी जानकारी कंपनी प्रबंधन तक को नहीं थी। नोटिस के बाद दोबारा निरीक्षण में कुछ सुधार जरूर हुआ, मगर तब तक नाले और उससे जुड़े जलस्रोत प्रभावित हो चुके थे। यह नाला आगे चलकर केलो नदी में मिलता है, जो आसपास के कई गांवों के लिए निस्तारी का प्रमुख साधन है। गंभीर चूक को देखते हुए मंडल ने जेपीएल पर 3.30 लाख रुपए का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है।

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