अलवर में कटी घाटी के पास जयसमंद झील के तिराहे पर कुर्सियां लगाकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने अरावली के मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा। जूली ने कहा कि अरावली माता को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने फैसला लिया है कि सभी जिलों में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इसी क्रम में 27 दिसंबर को अलवर शहर से एक बड़े जनजागरण अभियान की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस अभियान में पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पवन खेड़ा सहित कई वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित किया गया है। अलवर से इस अभियान की उच्च स्तर पर शुरुआत होगी।
जूली ने कहा कि मैं हमारे सांसद और केंद्र के मंत्री से पूछना चाहता हूं कि ऐसी क्या मजबूरियां आ गईं कि आपने अरावली माता को ही दांव पर लगा दिया। अरावली की गोद में कई प्राचीन मंदिर और देवस्थान बसे हुए हैं। आपके इस निर्णय से आने वाले समय में इन मंदिरों पर भी संकट खड़ा हो जाएगा। गुजरात से लगते अंतिम छोर गुरु शिखर तक के पहाड़ और वहां स्थित मंदिर भी खतरे में आ जाएंगे। जूली ने कहा कि मैं मंत्री जी से यह भी पूछना चाहता हूं कि कल आपने जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की और जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया, उसकी पोल मैं खोलना चाहता हूं। सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है कि अरावली में खनन नहीं होगा, यह आदेश पहले से लागू है। हमारा सवाल उन पहाड़ियों को लेकर है जिन्हें आपने फीते से नापकर अरावली से बाहर कर दिया। उनमें कितना खनन होगा? उन्होंने कहा कि मात्र एक प्रतिशत पहाड़ियां ही 100 मीटर से ऊंची हैं और लगभग 90 प्रतिशत पहाड़ियों को खनन क्षेत्र में दे दिया जाएगा, जिससे आने वाले समय में जनता का जीना मुश्किल हो जाएगा। आखिर ऐसा कौन-सा लालच, लोभ या मजबूरी है कि अरावली का सौदा किया जा रहा है और उसे उद्योगपति मित्रों को सौंपा जा रहा है? जूली ने आरोप लगाया कि अलवर सहित अन्य जिलों में 20 लीज दे दी गई हैं। क्या इसके लिए कोई नोटिफिकेशन जारी किया गया है? क्या क्षेत्र चिन्हित किया गया है? किस आधार पर इन पहाड़ियों को अरावली नहीं माना जा रहा? जब आप जनता को प्रचारित कर रहे हैं कि अरावली को नष्ट नहीं होने देंगे और खनन नहीं होगा, तो उसका आधार क्या है? उन्होंने मुख्यमंत्री से भी सवाल करते हुए कहा कि चार दिन पहले मुख्यमंत्री ने भाषण दिया था कि अरावली को कुछ नहीं होने देंगे। चार दिन में आपने क्या किया? क्या ऐसे प्रयास किए गए जिससे अरावली को बचाया जा सके? जूली ने तंज कसते हुए कहा कि पहली बार मुख्यमंत्री बिना पर्ची के बोलने गए तो मुश्किल में आ गए। कभी अरुण चतुर्वेदी को आगे कर दिया जाता है, कभी राजेंद्र राठौड़ को। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार, भारत सरकार और दोनों वन मंत्रियों का स्टैंड स्पष्ट किया जाए। जनता को गुमराह करना बंद करें। हर आदमी रोटी भी खाता है और समझ भी रखता है।
जूली ने कहा कि अगर अरावली को लेकर सब कुछ सुरक्षित है तो सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर बदलवाया क्यों नहीं गया? जब सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन से ही अरावली की परिभाषा बदल दी जाएगी, तो इन पहाड़ियों की रक्षा कौन करेगा? उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 में नई फाइल तैयार की गई, नई कमेटी बनाई गई और अधिकारियों से रिपोर्ट बनवाकर सुप्रीम कोर्ट से इसे फाइनल करवाया गया, जो गलत है। जूली ने कहा कि सीटीएच कोई छोटी बात नहीं थी। जब 50 लीज चलाने के लिए सीटीएच तक बदला जा सकता है, तो अरावली खुदवाने के लिए कुछ भी किया जा सकता है। कांग्रेस पार्टी अरावली को बचाने के लिए जिस स्तर तक भी जाना पड़ेगा, जाएगी और अरावली को बर्बाद नहीं होने देगी।
उन्होंने आगे कहा कि परसों अचानक 5, 7, 10 थानेदारों को सस्पेंड कर दिया गया। क्या इससे पहले पता नहीं था कि यहां अवैध खनन हो रहा है? जब वन विभाग के अधिकारी को कुचलकर मारा गया, जब पुलिस कांस्टेबल को कुचला गया, तब क्या जानकारी नहीं थी? उन्होंने सवाल उठाया कि कार्रवाई सिर्फ पुलिस पर ही क्यों? राजस्व विभाग, माइनिंग विभाग और फॉरेस्ट विभाग कहां हैं? क्या इन्हें अवैध खनन की जानकारी नहीं थी? सब कुछ पता होने के बावजूद आंखें मूंद ली गईं। जूली ने आरोप लगाया कि सब अपने-अपने घर भरने में लगे हैं।


