जैसलमेर में नेवले से जंग में लहूलुहान हुआ ‘नागराज’:खेत मालिक ने बर्तन से ढककर दी सुरक्षा; स्नेक कैचर ने किया घायल कोबरा का इलाज

पश्चिमी राजस्थान के धोरों में जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम और संवेदना की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने इंसानियत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। जैसलमेर जिला मुख्यालय से करीब 37 किलोमीटर दूर कीता गांव में एक परिवार ने न केवल एक जहरीले कोबरा की जान बचाई, बल्कि उसके घायल होने पर उसे वह सुरक्षा प्रदान की जिसकी उम्मीद कम ही की जाती है। नेवले के साथ खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हुए एक कोबरा को देव राम के परिवार और स्नेक कैचर साहिल खान की तत्परता से नया जीवन मिला है। साहिल ने मौके पर जाकर उसका इलाज किया और हुए उसे सुरक्षित जगह पर छोड़ दिया। गांव वाले साहिल खान की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। खेत में हुआ ‘अस्तित्व’ का संघर्ष घटना कीता गांव स्थित देव राम के खेत की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खेत के एक कोने में एक विशालकाय कोबरा और नेवले के बीच आमना-सामना हो गया। प्रकृति के इन दो धुर विरोधियों के बीच काफी देर तक संघर्ष चला। नेवले के घातक हमलों के कारण कोबरा का फन बुरी तरह लहूलुहान हो गया और वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। संघर्ष के बाद नेवला तो वहां से चला गया, लेकिन कोबरा दर्द से तड़पता हुआ वहीं पड़ा रहा। डर पर भारी पड़ी इंसानियत: बर्तन से ढका फन जब देव राम और उनके परिवार के सदस्यों ने खेत में घायल अवस्था में कोबरा को देखा, तो वे डरे नहीं। आमतौर पर सांप को देखते ही लोग लाठी-डंडे उठा लेते हैं, लेकिन यहां दृश्य अलग था। परिवार ने देखा कि कोबरा का फन खून से लथपथ है और वह चलने की स्थिति में भी नहीं है। सांप की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवार ने सूझबूझ दिखाई और उसे एक बड़े बर्तन (तगारी या टोकनी) से सावधानीपूर्वक ढक दिया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि घायल सांप धूप से बचा रहे और कोई अन्य शिकारी जानवर उस पर दोबारा हमला न कर सके। साहिल खान ने किया रेस्क्यू और ‘फर्स्ट एड’ सांप के सुरक्षित होने के बाद तुरंत वन्यजीव प्रेमी और स्नेक कैचर साहिल खान को इसकी सूचना दी गई। सूचना मिलते ही साहिल खान मौके पर पहुँचे। उन्होंने देखा कि कोबरा काफी गहरा जख्मी था। साहिल ने बड़ी ही कुशलता से कोबरा का रेस्क्यू किया और मौके पर ही उसका प्राथमिक इलाज किया। सांप के घावों को साफ कर उन्हें संक्रमण से बचाने के उपाय किए गए। सुरक्षित प्राकृतिक वास में छोड़ा प्राथमिक इलाज के बाद जब कोबरा की स्थिति में थोड़ा सुधार दिखा और वह हरकत करने लगा, तब उसे एक विशेष बैग में सुरक्षित रखा गया। बाद में साहिल खान ने उसे आबादी क्षेत्र से दूर उसके अनुकूल प्राकृतिक आवास (जंगल) में सुरक्षित छोड़ दिया। साहिल खान ने बताया कि जैसलमेर जैसे रेतीले इलाकों में कोबरा पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और देव राम के परिवार ने उसे बचाकर पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान दिया है। क्या करें अगर घायल वन्यजीव दिखे? ये खबर भी पढ़ें। ….
स्पेन से जैसलमेर पहुंचे गिद्ध, सख्त खाल पसंदीदा भोजन:एक्सपर्ट बोले- ये थार का काला शहंशाह, इनके आगे इंफेक्शन भी नहीं टिकता जैसलमेर के प्रसिद्ध देगराय ओरण में इन दिनों विदेशी मेहमानों का जमावड़ा लगा है। मध्य एशिया और यूरोप के बर्फीले इलाकों से हजारों मील का सफर तय कर दुनिया के सबसे विशालकाय पक्षियों में शुमार सिनेरियस गिद्ध (Cinereous Vulture) और यूरेशियन ग्रिफन गिद्ध (Eurasian Griffon Vulture) के झुंड ने यहां दस्तक दी है।
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