जयपुर | नेमीसागर कालोनी में प्रवासरत आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि हम औरों का उपकार करेंगे तो जीवन में हमें भी उपकार ही मिलेगा। बुरे का प्रतिफल बुरा ही होता है। इससे पूर्व संघस्थ मुनि सुज्ञेय सागर महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि हम बाहरी वस्तुओं, रिश्ते नाते आदि में सुख ढूंढ रहे हैं, जबकि ये सब सच्चा सुख नहीं है। अगर सच्चा सुख चाहते हो तो कर्म का सिद्धांत समझना होगा। श्री नेमिनाथ दिगम्बर जैन समाज समिति के अध्यक्ष जेके जैन कालाडेरा ने बताया कि आचार्य सुन्दर सागर महाराज द्वारा राम कहानी पर व्याख्यान चल रहा है। आज की श्रंखला में नल एवं नील के पूर्व भव का वर्णन किया गया।


