जोधपुर में पहली बार समंदर में डूबी द्वारिका के दर्शन:बंगाल के कलाकारों ने एक माह की मेहनत से किया तैयार, 21 किलो की काजू कतली भी खास

जोधपुर में 9 जनवरी से पश्चिमी राजस्थान हस्तशिल्प उद्योग मेला शुरू हुआ है इस मेले में देशभर के 700 से अधिक हस्तशिल्पी स्टॉल पर अपने बनाए उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मेले में आकर्षण का केंद्र बनी है भेंट द्वारिका पर बनी अनूठी थीम। ये इसलिए भी खास है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों गुजरात में समंदर के अंदर डूबी द्वारिका का अवलोकन किया था और उसके अनुभव उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी शेयर किए थे उसके बाद से ही समन्दर की द्वारका काफी ट्रेंड में आ गई थी। ऐसे में बंगाल के रहने वाले कलाकार के मन में भी यह आया कि क्यों ना वह भी इस द्वारिका की थीम को इस मेले में आने वाले लोगों के लिए बनाए। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने जोधपुर के रावण का चबूतरा मेला मैदान में अनूठी थीम तैयार की है। जिसे करीब एक माह की मेहनत के बाद तैयार किया गयाहै। इसे बनाने वाले कलाकार संजीत मजूमदार बंगाल के निवासी है। उन्होंने बताया कि इसे 80*150 के एरिया में से बनाया गया है। इसे बनाने के लिए कारीगर भी बंगाल से आए हैं। 70 से 80 कारीगरों ने करीब 1 महीने की मेहनत के बाद इसे तैयार किया है इसे बनाने में करीब 45 से 50 लाख रुपए की लागत आई है। इसे बनाने में सबसे अधिक थर्माकोल, फाइबर, लकड़ी, वेस्ट कपड़ा आदि काम में लिया। इसमें भगवान की उस समय की द्वारिका नगरी कैसी थी। जिसे बताया गया है। उसके साथ ही लाइट और साउंड का कॉम्बिनेशन भी बिठाया गया है। उन्होंने बताया कि वो बचपन से ही इस फील्ड में है। पढ़ाई के दौरान ही वह इस तरह की चीजों को बनाने का काम सीखने लगे उसके बाद सही पिछले कई वर्षों से ही अलग-अलग थीम पर पंडाल सजा रहे हैं अध्यात्म से जुड़े होने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब समंदर में बसी द्वारिका का अवलोकन किया तो उनके मन में भी ख्याल आया कि क्यों ना मैं उन लोगों के लिए भी एक ऐसी द्वारिका की थीम बनाई चाहिए। क्योंकि हर कोई वहां जा नहीं सकता। इसलिए इसे तैयार किया गया है। द्वारिका की थीम यहां आने वाले लोगों के लिए सबकुछ नया है। पूरे भारत में अभी तक किसी ने ऐसी थीम नहीं बनाई है। ये अब तक की पहली थीम है। मैने कोशिश किया है कि आदमी को ऐसा महसूस हो कि वो समंदर के अंदर है और द्वारिका नगरी के दर्शन कर रहा है। थीम में द्वारिका के महल, किले सहित समंदर में पाई जाने वाली वनस्पतियां, समंदर की मिट्टी आदि बिछाई गई है। मेले में इसके अलावा ओर भी कई आकर्षण का केंद्र हैं। जिनमें जोधपुर के टीलावत काजू कतली भंडार की ओर से 21 किलो की काजू कतली तैयार की गई है। सिर्फ एक काजू कतली का वजन 21 किलो है इस मेले में स्पेशल बॉक्स में पे करके सजाया गया है जिसमें केसर आदि की फिनिशिंग की गई है। काजू कतली बनाने वाले धनंजय तिलावत ने बताया कि इस मेले में कुछ अलग हटकर करने के उद्देश्य से काजू कतली बनाई गई है इसे बनाने में करीब 2 घंटे का समय लगा। इसे ऑटोमेटिक मशीन के जरिए हाइजीनिक तरीके से बनाया गया है इसका उद्देश्य लोगों को स्वच्छ रहने और स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूक करना है।

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