झांसी से वैष्णो देवी जा रहे एक परिवार को मालवा एक्सप्रेस में अपनी रिजर्व सीट ढूंढ़े नहीं मिली। यात्री ने इसको लेकर टीटीई से सवाल-जवाब किए तो टीटीई भी उनके साथ उनकी सीट ढूंढने में जुट गए। जब दोनों को सीट नंबर नहीं मिला तो यात्री ने रेल मंत्रालय तक शिकायत कर दी। इसके बाद झांसी में बैठे अधिकारी यात्री को मनाने में जुट गए। लेकिन सीट फिर भी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने यात्री को यह कहकर मनाया कि उसे खाली होने पर दूसरी सीट अलॉट करवा दी जाएगी। लेकिन इस मामले में रेलवे की व्यवस्थाओं की पोल जरूर खुल गई। दरअसल, झांसी के रहने वाले एक रेलकर्मी ने परिवार के साथ जम्मू कश्मीर में श्रीमाता वैष्णो देवी दर्शन करने जाने का प्लान बनाया था। उन्होंने इसके लिए अपना रेलवे पास निकलवाया और उज्जैन से ट्रेन नंबर 12919 डॉ. अंबेडकर नगर-श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा मालवा एक्सप्रेस के सेकेंड एसी कोच में आईआरसीटीसी की वेबसाइट से टिकट बुक कर लिया। यात्री ने ट्रेन में सवार होने का स्टेशन वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी चुना था। इस यात्रा में उनके साथ परिवार के 5 सदस्य और थे। उन्होंने जब बुकिंग की थी तो उस समय उन्हें दो आरएसी यानी रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन और बाकी 1, 2, 3 और 4 वेटिंग मिली थी। हालांकि, जब ट्रेन का चार्ट बना तो सभी वेटिंग और आरएसी कन्फर्म सीट में बदल गईं। लेकिन रेलवे ने उन्हें जो 3 और 4 वेटिंग के बदले सीट दीं, वह पूरे कोच में नहीं मिलीं। चार मिलीं दो बर्थ थी ही नहीं
मालवा एक्सप्रेस 12 मिनट की देरी से रात 9.42 बजे आई थी। यात्री का रिजर्वेशन ट्रेन के सेकेंड एसी कोच A-1 में था।उन्हें इस कोच में बर्थ नंबर 24, 26, 33, 34, 53 और 54 मिली थी। जब वह कोच में पहुंचे तो बर्थ नंबर 53 और 54 छोड़कर बाकी अभी सीट मिल गईं। यात्री ने बहुत ढूंढा पर सीट नहीं मिली। टीटीई ने भी झांसी से ग्वालियर तक ढूंढी सीट
ट्रेन जब रात 9.55 बजे झांसी से ग्वालियर के लिए बढ़ी तो इसी दौरान टीटीई भी चेकिंग के लिए आ गए। उन्होंने यात्री का टिकट देखा तो वह भी परेशान हो गए। दैनिक भास्कर से बात करते हुए पीड़ित यात्री के साथ यात्रा कर रहे उनके दोस्त ने बताया कि टीटीई और यात्री दोनों ने मिलकर झांसी से ग्वालियर तक बर्थ नंबर 53 और 54 ढूंढी लेकिन नहीं मिली। यात्री ने रेल मंत्रालय तक की शिकायत
सीट न मिलने से परेशान रेलयात्री ने रेल मंत्रालय से इसकी शिकायत करते हुए कहा कि उन्हें वह बर्थ नंबर दे दिया गया जो ट्रेन के कोच में है ही नहीं। इसके बाद उनके पास रेल अधिकारियों ने फोन कर समझाने का प्रयास शुरू कर दिया। सहयात्रियों ने बताया कि रेलवे ने उन्हें भरोसा दिया कि आगे सीट खाली होने पर उन्हें दूसरी सीट दे दी जाएगी। दूसरे यात्री नहीं आए तभी मिलेगी सीट
रेलवे के चीफ टिकिट कलेक्टर हुकुम सिंह चौहान ने बताया कि यात्री को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर तभी सीट दी जा सकती है, जब दूसरी सीट पर यात्रा करने वाले यात्री उसी स्टेशन तक यात्रा कर रहे हों, जहां तक पीड़ित यात्री को जान है। यदि वह यात्री नहीं आते हैं तभी ऑनबोर्ड टीटीई वह सीट पीड़ित यात्री को अलॉट कर सकता है। थर्ड पार्टी एप ने भी कर दिया गुमराह
ट्रेन में सवार होने से पहले यात्री ने एक थर्ड पार्टी यानी वह एप जिसकी जिम्मेवारी रेलवे नहीं लेता, उससे ट्रेन का स्टेटस और कोच पोजिशन देखी थी। यात्री ने बताया कि एप में जब उन्होंने अपना पीएनआर नंबर डाला तो उसमें भी 53 और 54 नंबर बर्थ दिखा रहे थे, लेकिन कोच में वे बर्थ नहीं थीं।


