झाबुआ जिले के अध्यापक शिक्षक संवर्ग ने अपनी लंबित मांगों और समस्याओं के निराकरण के लिए प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आजाद अध्यापक शिक्षक संघ मध्यप्रदेश के आह्वान पर जिला मुख्यालय पर एक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जिसका नेतृत्व जिलाध्यक्ष दीवानसिंह भूरिया ने किया। आंदोलन की शुरुआत में जिले भर से आए सैकड़ों शिक्षक स्थानीय अंबेडकर पार्क में एकत्रित हुए, जहां उन्होंने धरना दिया। इस दौरान वक्ताओं ने शिक्षकों के साथ हो रहे भेदभाव और विसंगतियों पर कड़ा रोष व्यक्त किया। इसके बाद शिक्षक नारेबाजी करते हुए रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। आंदोलन का मुख्य केंद्र पुरानी पेंशन योजना की बहाली और प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता की गणना करना रहा। शिक्षकों का तर्क है कि उन्हें क्रमोन्नति, समयमान वेतनमान, ग्रेच्युटी और अवकाशों के नगदीकरण का लाभ उनकी वास्तविक सेवा अवधि के आधार पर मिलना चाहिए। शत-प्रतिशत वेतन भुगतान मिले ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर शिक्षकों में भारी असंतोष है। उनकी मांग है कि यह नियम विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर समान रूप से लागू हो, अन्यथा शिक्षकों को इससे मुक्त रखा जाए। इसके साथ ही शिक्षकों ने केंद्र के समान 1 जनवरी 2026 से आठवें वेतनमान की मांग की और नवनियुक्त शिक्षकों को दी जा रही 80 एवं 90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था को समाप्त कर सीधे शत-प्रतिशत वेतन भुगतान करने की मांग उठाई। अनुकंपा नियुक्ति के मामलों का जल्द निराकरण हो शिक्षकों ने अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों का त्वरित निराकरण, गुरुजी संवर्ग से आए शिक्षकों को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता प्रदान करने और विभाग परिवर्तन कर प्रतिनियुक्ति पर आए शिक्षकों को उसी विभाग में संविलियन करने पर जोर दिया। इसके अलावा, सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए और शनिवार का अवकाश या उसके बदले अर्जित अवकाश की सुविधा प्रदान की जाए। ज्ञापन के माध्यम से शासन को चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी जायज मांगों जैसे कैशलेस मेडिकल सुविधा, स्वैच्छिक स्थानांतरण और समय पर पदोन्नति पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।


