झारखंड में पहली बार ड्रोन से पौधरोपण किया गया। इसकी शुरुआत चांडिल वन क्षेत्र के कुशपुतुल में हुई। डीएफओ सबा आलम अंसारी की निगरानी में यह कार्य पूरा हुआ। ड्रोन से उन दुर्गम पहाड़ी इलाकों में बीज गिराए गए, जहां पैदल या वाहन से पहुंचना मुश्किल होता है। बांस और फलदार पौधों के सीड बॉल्स ड्रोन से गिराए गए। सीड बॉल्स मिट्टी की गेंदें होती हैं, जिनमें बीज और खाद मिलाया जाता है। बारिश में मिट्टी में नमी आते ही बीज अंकुरित होकर पौधे बन जाते हैं। यह तकनीक प्राकृतिक रूप से पौधों की वृद्धि में मदद करती है। हाथियों को उपलब्ध हो सकेगा भोजन
वन विभाग ने ड्रोन से 5 लाख से अधिक पौधरोपण का लक्ष्य तय किया है। इसका उद्देश्य हरित क्षेत्र बढ़ाना और जंगल में रहने वाले जानवरों, खासकर हाथियों को भोजन उपलब्ध कराना है। डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि चांडिल क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही अधिक होती है। उनके लिए भोजन की व्यवस्था के तहत पहाड़ी इलाकों में ड्रोन से पौधरोपण किया गया। तीन साल से लाल गिलहरी, मोर, नेवला की संख्या बढ़ रही इधर, दलमा में वार्षिक पशुगणना जून के दूसरे सप्ताह में शुरू होगी। इसके लिए वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। गणना दलमा को दो भागों में बांटकर की जाएगी। दलमा पूर्वी और दलमा पश्चिम में 100 से अधिक वनकर्मी तैनात रहेंगे। पशुगणना तीन तरीकों से होगी। जलस्रोतों के पास, हाइड आउट यानी गुफानुमा स्थानों के पास और मचान के सहारे वनकर्मी पशुओं की गिनती करेंगे। सभी स्थानों पर कैमरे और विशेष प्रकार के फार्म के साथ वनकर्मी मौजूद रहेंगे। दलमा में 80 से अधिक मचान बनाए जाएंगे। 20 हाइड आउट भी तैयार होंगे। इसके अलावा 6 वॉच टावर से भी पशुओं की गणना की जाएगी। दलमा में 70 से अधिक जलस्रोत हैं, जहां पशु-पक्षी पानी पीने आते हैं। ये जलस्रोत गणना में काफी मददगार साबित होते हैं। छोटे जानवरों की बढ़ सकती है संख्या
वन विभाग का मानना है कि इस बार छोटे जानवरों की संख्या बढ़ सकती है। बार्किंग डियर, भालू, लाल गिलहरी, मोर, नेवला, खरगोश और बंदर जैसे जानवरों की संख्या में इजाफा हो सकता है। पिछले तीन साल से इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। 2024 की गणना में दलमा में 39 भालू पाए गए थे। इस बार इनकी संख्या 45 के पार जा सकती है। वहीं, हाथियों की संख्या में हर साल गिरावट आ रही है। 2024 की गणना में दलमा में 85 हाथी दर्ज किए गए थे। जून के दूसरे सप्ताह में दलमा में वार्षिक पशुगणना होगी। लाल गिलहरी, बार्किंग डीयर, भालू, खरगोश समेत अन्य जानवरों की संख्या बढ़ सकती है। 100 वनकर्मी विभिन्न जलश्रोत, मचान से पशुओं की गणना करेंगे। -सबा आलम अंसारी, डीएफओ


