झारखंड में बाल विवाह रोकने के लिए समाज कल्याण निदेशालय मुहिम छेड़ेगा। खुद का बाल विवाह रुकवाने वाली बच्चियों की कहानियां गांव-गांव में सुनाई जाएंगी। लोगों को बताया जाएगा कि इन बच्चियों ने विरोध क्यों किया। उनमें इतना साहस कैसे आया। घर के लोगों को कैसे मनाया। प्रशासन ने उन्हें किस तरह से सहयोग किया। इसमें क्या-क्या अड़चनें आईं। साथ ही इस कुप्रथा के खिलाफ बने कानून के बारे में भी लोगों को बताया जाएगा। निदेशालय ने करीब एक दर्जन ऐसी लड़कियों का चयन किया है, जिन्होंने बाल विवाह का विरोध कर पढ़ाई जारी रखी और आज अच्छे मुकाम पर है। बाल विवाह का विरोध करते हुए इन्होंने कहा था, हमें अभी पढ़ना है मां-बाप ने शादी तय की तो सीएम से मिलकर रुकवाया करीब एक दशक पहले गुमला की छात्रा डॉली ने खुद का बाल विवाह रुकवाकर साहसिक कदम उठाया था। उसके माता-पिता ने 17 साल की उम्र में उसकी शादी तय कर दी। उसने इसका विरोध किया। रांची में हो रहे एक सरकारी कार्यक्रम में वह तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिलीं। उनसे शादी रुकवाने का अनुरोध किया। कहा कि वह अभी पढ़ना चाहती हैं। रघुवर दास ने तत्काल लड़की के पिता को फोन लगाया। उन्हें समझाया। पिता को बेटी की पढ़ाई जारी रखने के लिए भी राजी किया। 50.50% बाल विवाह जामताड़ा में जिला बाल विवाह स्रोत : नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे-5 की रिपोर्ट 13 साल की उम्र में हो रही थी शादी… विरोध कर रुकवाया गुमला की ही बिरसमुनी कुमारी ने भी खुद के बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाया था। उस समय वह सिर्फ 13 साल की थी, जब उसकी शादी तय कर दी गई। लेकिन उसने शादी करने से इनकार कर दिया। उसके इस साहसिक कार्य को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उसे एक लाख रुपए का नकद इनाम दिया। सरकार ने उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने की भी घोषणा की। स्कूल में उसका एडमिशन भी कराया। साथ ही लड़कियों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने और पढ़ाई पूरी करने के लिए प्रेरित किया।


