रांची का बड़ा तालाब (स्वामी विवेकानंद सरोवर) इस बार विदेशी मेहमानों का इंतजार कर रहा है। क्योंकि, हर वर्ष की तरह इस बार बड़ा तालाब में प्रवासी पक्षी नहीं पहुंचे हैं। तालाब के अंदर चारों ओर मछली पकड़ने के लिए लगाए गए जाल और प्रदूषण की वजह से पक्षियों की संख्या कम है। क्योंकि, दिसंबर की शुरुआत में जो पक्षी यहां पहुंचे थे, वे यहां से धुर्वा, कांके और पतरातू डैम की ओर चले गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि तालाब के अंदर फैली गंदगी की वजह से पक्षियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है। इसलिए कुछ पक्षी तालाब के एक कोने में सिमटे हुए हैं। जानकारों ने बताया कि साइबेरिया से साइबेरियन डक ठंड के मौसम में प्रजनन के लिए रांची आते हैं। लेकिन इस बार पक्षियों की संख्या कम होने से तालाब की साफ-सफाई पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। तालाब के अंदर फैली गंदगी से पक्षियों को खाने में होती है दिक्कत, एक कोने में सिमटी बड़ा तालाब की गायब हुई जमीन आज से खोजेगा निगम बड़ा तालाब का निर्माण 1842 में 53 एकड़ जमीन पर कराया गया था। लेकिन अब यह सिकुड़ कर मात्र 17 एकड़ में रह गया है। तालाब की करीब 36 एकड़ जमीन गायब हो गई। अब गायब हुई जमीन को नगर निगम की टीम खोजेगी। निगम प्रशासक सुशांत गौरव के निर्देश पर निगम की टीम सोमवार से तालाब की गायब हुई जमीन की मापी करेगी। इसका ड्रोन सर्वे भी कराया जाएगा, ताकि वर्तमान में तालाब की जमीन पर हुए अतिक्रमण को चिह्नित किया जा सके। अतिक्रमण कर बने भवनों की मापी और वैधता की जांच की जाएगी, ताकि पता चले कि आखिर नक्शा कैसे पास हुआ। इसके बाद सभी अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजा जाएगा। वे स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो निगम बलपूर्वक उसे तोड़ेगा। इधर, निगम प्रशासक ने तालाब में सफाई बनाए रखने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को पूरी क्षमता से चलाने का निर्देश दिया है। मालूम हो कि तालाब के किनारे सड़क का निर्माण होने के बाद किनारे में कई घर-दुकानें बन गई। पूर्व में हाईकोर्ट के आदेश के बाद निगम ने मापी कराई थी, लेकिन छिटपुट अतिक्रमण हटाकर मामला शांत हो गया।


