आरोग्य भारती चित्तौड़ प्रांत जिला झालावाड़ के तत्वावधान में ग्राम पंचायत थनावाद में आयुर्वेद चिकित्सा परामर्श शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में 215 रोगियों को आयुर्वेद की विशिष्ट चिकित्सा अग्निकर्म और आस्टियोपैथी से लाभान्वित किया गया। आरोग्य भारती झालावाड़ के सचिव डॉ. नवल किशोर टेलर ने बताया कि शिविर में कमर, गर्दन, कंधे का दर्द, स्लिप डिस्क, सायटिका, माइग्रेन, सिरदर्द, जॉइंट पेन, आर्थराइटिस, पाचन संबंधी समस्याएं और सांस की दिक्कत जैसे रोगों का उपचार किया गया। कुल 215 रोगियों को परामर्श दिया गया, जिनमें से चिह्नित रोगियों को आस्टियोपैथी और अग्निकर्म से भी लाभ मिला। आस्टियोपैथी के बारे में दी जानकारी
डॉ. संदीप निर्मल ने आस्टियोपैथी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हड्डियों, मांसपेशियों, नसों, रक्त और लसीका संचार में असंतुलन या जकड़न से दर्द और बीमारियां उत्पन्न होती हैं। यह चिकित्सा हड्डियों और जोड़ों की गलत स्थिति को सुधारती है, मांसपेशियों की जकड़न दूर करती है, रक्त और तंत्रिका प्रवाह को बेहतर बनाती है, नसों पर दबाव कम करती है और सूजन व दर्द को घटाती है। इससे शरीर की स्वयं ठीक होने की क्षमता बढ़ती है और दवाओं पर निर्भरता कम होती है। अग्निकर्म थेरेपी का बताया महत्व
डॉ. प्रियांशु पारेता ने अग्निकर्म थेरेपी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह आयुर्वेद की एक विशिष्ट चिकित्सा है, जिससे रोगियों को त्वरित लाभ मिलता है। आयुर्वेद के अनुसार, वातजन्य रोगों में अग्निकर्म से श्रेष्ठ कोई चिकित्सा नहीं है। यह वात और कफ दोषों का शमन कर तीव्र और पुराने दर्द को समाप्त करती है, जिससे रोगों की पुनरावृत्ति नहीं होती।
थनावाद निवासी पानाचंद मीणा ने बताया कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के इस शिविर के प्रति ग्रामीणों में काफी उत्साह देखा गया। कई रोगियों को उनके दर्द और अन्य बीमारियों में तुरंत आराम मिला। चिकित्सा शिविर के सफल आयोजन में रामबाबू मीणा और रवि रेगर का विशेष सहयोग रहा।


