टोंक में पिछले तीन दिनों से बढ़ रही ठंडक ने लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है। गुरुवार सुबह हल्की ठंडी हवा चली। कुछ जगह हल्के बादल छाए रहे, लेकिन सूर्य निकलने के साथ मौसम साफ हो गया। बीसलपुर बांध का गेट 127वें दिन भी खुला हुआ है और बनास नदी में 601 क्यूसेक पानी लगातार छोड़ा जा रहा है। तापमान स्थिर है और सर्दी और बढ़ने की संभावना है। सुबह-सुबह ठंडी हवा, लोगों की दिनचर्या पर असर जिले में लगातार दूसरे-तीसरे दिन भी ठंडक का प्रभाव दिखा। गुरुवार सुबह हल्की ठंडी हवा चली। कुछ जगह हल्के बादल छाए रहे, लेकिन सूर्य निकलने के साथ मौसम साफ हो गया। सुबह दस बजे तक सर्द हवा चलने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित रही। लोग घरों से ऊनी कोट पहनकर ही बाहर निकले। बच्चे भी ठंडी हवा से प्रभावित, कई ठिठुरते दिखे दुपहिया वाहन चालक और खुले में आने-जाने वाले लोगों ने भी पहले से ज्यादा ऊनी कपड़े पहने। स्कूल जाने वाले बच्चों को भी ठंडी हवा का सामना करना पड़ा और कई बच्चे ठिठुरते नजर आए। तापमान में स्थिरता, आगे ठंड और बढ़ने के आसार सर्द हवा बढ़ने से पिछले दो-तीन दिनों से तापमान लगभग स्थिर बना हुआ है। गुरुवार को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने के संकेत हैं। खासकर सुबह, शाम और रात के समय लोग ज्यादा ऊनी कपड़े पहनते दिख रहे हैं। बीसलपुर बांध का गेट 127वें दिन भी खुला उधर बीसलपुर बांध का गेट लगातार 127वें दिन भी खुला हुआ है। पिछले नौ दिनों से गेट नंबर 11 को 0.10 मीटर खोलकर प्रति सेकेंड 601 क्यूसेक पानी की निकासी स्थिर रूप से की जा रही है। अब तक 140 टीएमसी पानी छोड़ा इस सीजन में अब तक बांध से 140 टीएमसी पानी बनास नदी में छोड़ा जा चुका है। यह पानी बेकार भी कहा जा रहा है क्योंकि इतनी मात्रा से बांध तीन बार से भी ज्यादा भर सकता था। इसके बावजूद पानी निकासी जारी है। बारिश नहीं, फिर भी बनी है पानी की आवक इस साल बारिश का दौर थमे हुए काफी समय हो गया है, लेकिन ऊपरी क्षेत्रों से धीमी गति से पानी की आवक बनी हुई है। इसी कारण एक गेट लगातार खुला रखा गया है। बांध का यह गेट 24 जुलाई को खोला गया था। बांध फुल भराव क्षमता पर, जल स्तर 315.50 RL मीटर बीसलपुर बांध परियोजना के XEN मनीष बंसल और AEN दिनेश बैरवा ने बताया कि बांध फिलहाल फुल भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर तक भरा हुआ है। पानी की आवक के अनुसार निकासी को आगे भी नियंत्रित किया जाएगा।


