झारखंड में ट्रैफिकिंग या मानव तस्करी की समस्या सबसे आम है। ट्रैफिकिंग के सबसे ज्यादा शिकार लड़कियां और बच्चे हैं। टीआरआई ने 2023 में ‘ह्मूमन ट्रैफिकिंग इन झारखंड’ नाम से शोध कराया। शोध से जुड़े व बाल कल्याण संघ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर व सेक्रेटरी संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि 2019 से 2021 तक महिलाओं सहित 509 बच्चों को नई दिल्ली से बचाया गया। हमने बाल कल्याण संघ व अन्य एनजीओ से मिलकर उनके पुनर्वासित करने की पहल की। स्वावलंबन कार्यक्रम के माध्यम से पिछले 15 वर्षों की 1197 लड़कियों को सुरक्षा गार्ड के रूप में प्रशिक्षित किया गया जो तस्करी से बची थीं। इन लड़कियों को कस्तूरबा गांधी विद्यालय, ऑड्रे हाउस सहित कई जगहों पर नौकरी मिली। बाल यौन शोषण की रोकथाम के लिए किशोरियों को सशक्त बनाने के लिए मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी दिलाई। 2004 में 5000 बाल श्रमिक थे, 2024 में 228 झारखंड के कोडरमा व गिरिडीह जिले अवैध माइका खनन के कारण बाल श्रम की समस्या से जूझ रहे थे, जहां बच्चे खदानों में काम करने के लिए मजबूर थे। वर्ष 2004 में किए गए एक सर्वे में लगभग 5,000 बाल श्रमिकों की पहचान हुई थी, जो 2019 तक बढ़कर 20 हजार हो गई। इससे निपटने के लिए NCPCR (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) के नेतृत्व में स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों ने मिलकर बड़ा प्रयास शुरू किया। माइका पर निर्भर परिवारों को वैकल्पिक रोजगार से जोड़ा गया-जैसे टोकरी बनाना, किराना दुकान खोलना, मुर्गी व बकरी पालन आदि, ताकि बच्चों को कमाने के लिए मजबूर न होना पड़े। बच्चों को स्कूल में नामांकित किया गया। वर्ष 2024 में पुनः NCPCR द्वारा किए गए सर्वे में पाया गया कि अब केवल 228 बच्चे ही बाल श्रमिक हैं। सारे बच्चों का स्कूलों में नामांकन कराया गया
2011 में बचपन बचाओ आंदोलन ने 2 सालों में देश के 392 जिले में सर्वे कराया। रिजल्ट आया कि 11 हजार 748 बच्चे मिसिंग हैं। 2017 में पाया गया कि 33 हजार लड़कियां हर साल झारखंड से बड़े शहरों में पलायन कर रही हैं। 2019 में पता चला कि झारखंड के 7 जिलों गुमला, खूंटी, लातेहार, पाकुड़, साहेबगंज, सिमडेगा व प.सिंहभूम से सबसे ज्यादा केस देखे गए। कोरोना काल में 508 बच्चों को दिल्ली से मुक्त कराया गया। उन्हें सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजना से जोड़ा गया। हाल ही में मई 2025 में खूंटी के मुरहू प्रखंड में बाल कल्याण संघ द्वारा 2 पंचायत में सर्वे किया गया जिसमें 120 बच्चे बाल मजदूरी में लिप्त पाए गए। इन्हें शत प्रतिशत स्कूल में नामांकन कराया गया व हाउस कीपिंग, सिक्योरिटी गार्ड, कंप्यूटर आदि में प्रशिक्षित किए जा रहे हैं।


