जिला स्कूल मैदान में राष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन किया गया है। किताबों के इस मेले में 25 स्टॉल सजे हैं। पुस्तक प्रेमी सुबह 10 बजे से ही स्टॉलों में अपनी पसंद की किताबें लेने पहुंच रहे हैं। सोमवार को कड़ाके की ठंड के बावजूद युवा, बच्चे समेत बुजुर्ग वर्ग अच्छी तादाद में पहुंचे थे। यह मेला 4 जनवरी तक चलेगा। मेले में प्रेमचंद, हरिवंश राय बच्चन, दिनकर की किताबों की मांग ज्यादा है। स्टॉलों पर इनकी मांग अधिक रही। बच्चों की नृत्य प्रतियोगिता और कवयित्री सम्मेलन आज : पुस्तक मेले में आज दो खास आयोजन हैं। अपराह्न 3:00 बजे से विभिन्न आयुवर्ग के बच्चे अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों को जिस गीत पर नृत्य करना है, उसका ऑडियो सीडी अपने साथ लाना होगा। यह प्रतियोगिता बच्चों के लिए नि:शुल्क है। कवयित्री सम्मेलन : काव्य रसिक श्रोताओं के लिए झारखंड हिंदी साहित्य मंच की ओर से सायं 4:50 बजे कवयित्री सम्मेलन का आयोजन किया गया है। इसमें गीता सिन्हा ‘गीतांजलि’, अनीता रश्मि, रिम्मी वर्मा, रेणुबाला धार, रेणु झा ‘रेणुका’, पूनम वर्मा, कविता विकास, सुनीता अग्रवाल, बिम्मी प्रसाद, डॉ. उर्मिला सिन्हा, सुनीता श्रीवास्तव ‘जागृति’, रश्मि सिन्हा, सीमा कुमार, मधुमिता शाह और डॉ. भावना अंबष्ठ प्रमुख रूप से भाग लेंगी। पुस्तक मेले में पहुंचे विभिन्न पाठकों ने अपनी राय व्यक्त की : मोरहाबादी के शंकर वर्मा ने कहा कि पुस्तक मेला लगना अच्छी पहल है। प्रेमचंद, दिनकर, हरिवंश राय बच्चन जैसे लेखकों का कोई जोड़ नहीं है, उनकी पुस्तकें लाजवाब होती हैं, लेकिन फिर भी नई शोध की पुस्तकें भी आनी चाहिए। चिरौंदी से आए एसएन मिश्रा ने कहा, “पुस्तक मेला लगना ही चाहिए। आज बच्चे, युवा सभी टीवी और मोबाइल में डूबे रहते हैं। सरकारी स्तर पर शहर-गांव में ऐसे आयोजन हों तो लोगों की रूचि किताबों के प्रति बढ़ेगी। इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। अतिथियों ने मेला परिसर का भ्रमण कर विभिन्न स्टॉलों पर प्रदर्शित पुस्तकों का अवलोकन किया और आयोजन की सराहना की । कहा कि बच्चों के लिए ऐसे आयोजन बहुत महत्वपूर्ण हैं। कई पुस्तकों में राज्य के क्रांतिकारियों की संघर्षगाथा को रंगीन चित्रों के साथ प्रस्तुत किया गया है। अतिथियों ने इसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी बताया।


