300 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न के लालच में एक इंजीनियर को ऑनलाइन ट्रेडिंग में लाखों रुपए गंवा बैठा। ट्रेडिंग का सपना दिखाकर साइबर ठगों ने इंजीनियर को 51 लाख रुपए से ज्यादा का चूना लगा दिया। ठगों ने पहले फर्जी रिटर्न दिखाए, फिर ग्रुप चैट में कमाई के स्क्रीनशॉट शेयर कर भरोसा दिलाया। धीरे-धीरे इंजीनियर हेमराज निवासी जवाहर नगर को यकीन हो गया कि यह सच है और उसने लाखों रुपए निवेश कर दिए। लेकिन जब रकम निकालनी चाही तो पैसे फंसे रह गए। 26 अक्टूबर को इंजीनियर को वाट्सएप पर ए16 एंड स्मॉल इन्वेस्टर यूनियन डिस्कशन ग्रुप में जोड़ा गया। इस ग्रुप में 250–300 लोग शामिल थे। ग्रुप एडमिन ने खुद को अरूणाभ ठाकुर बताया और दावा किया कि उसने 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का फंड मैनेज किया है और 300 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न हासिल किया है। ग्रुप में लोग उसके सुझावों पर स्टॉक ट्रेडिंग कर रहे थे और अपनी कमाई के स्क्रीनशॉट शेयर कर रहे थे। यही माहौल देखकर इंजीनियर को भरोसा हो गया। उसे Maverik CAP नामक एप डाउनलोड कराया गया। ग्रुप में सेबी की वेबसाइट का लिंक भी साझा किया गया, जिसमें एप का पंजीकरण होना बताया गया। सब कुछ इतना व्यवस्थित था कि पीड़ित को लगा यह असली निवेश प्लेटफॉर्म है। करीब एक महीने तक ग्रुप की गतिविधियों को देखने के बाद इंजीनियर ने सबसे पहले 50 हजार रुपए जमा कराए। इसके बाद अलग-अलग कुल 12 ट्रांजेक्शनों में कुल 51.50 लाख रुपए निवेश कर दिए। लेकिन जब उसने रकम निकालनी चाही तो पैसे नहीं निकले। तभी उसे समझ आया कि यह पूरा खेल ठगी का था। मुनाफे के लालच में लिया लोन, वो रकम भी फंसी गई
इंजीनियर को लगा कि बैंक से लिए गए 41 लाख रुपए के पर्सनल लोन पर जो ब्याज देना होगा, उससे कहीं ज्यादा उसे ऑनलाइन ट्रेडिंग से मुनाफा मिलेगा। ठगों ने 300 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न का दावा किया था, जो किसी भी बैंक के ब्याज दर से कई गुना ज्यादा था। इसी तुलना ने इंजीनियर को यकीन दिलाया कि वह आसानी से लोन चुकता कर देगा और ऊपर से भारी कमाई भी कर लेगा। लेकिन हकीकत यह रही कि रिटर्न के नाम पर उसके साथ साइबर ठगी हो गई।


