भास्कर न्यूज | लुधियाना लुधियाना की डाइंग इंडस्ट्री में ट्रीट किए गए पानी को और अधिक पारदर्शी, सटीक व रीसायकल योग्य बनाने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार की प्रमुख अनुसंधान इकाई ने पंजाब डायर एसोसिएशन (पीडीए) को रेडिएशन आधारित विशेष तकनीक अपनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत ट्रायल बेस पर 100 केएलडी (किलो लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाला ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। यह तकनीक डाइंग इंडस्ट्री के रंगीन पानी को पारदर्शी बनाएगी और पानी में टीडीएस के सटीक परिणाम देने में सक्षम होगी। टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट विभाग के प्रमुख डॉ. वरिंदर कुमार के नेतृत्व में डॉ. वाई.के. भारद्वाज (एसोसिएट डायरेक्टर, रेडियोकेमिस्ट्री और आइसोटोप ग्रुप), डॉ. नीलांजल मिश्रा (सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर) और सीनियर टेक्नीशियन अनिल खैरे ने एसोसिएशन के साथ यह प्रस्ताव साझा किया। डॉ. मिश्रा ने बताया कि यह तकनीक राजस्थान के जोधपुर में सफलतापूर्वक स्थापित की जा चुकी है, जिसे वहां के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से फील्ड ट्रायल्स के आधार पर अनुमति मिल चुकी है। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मोड के माध्यम से यह तकनीक चार प्राइवेट लाइसेंसधारकों को सौंपी जा चुकी है और अब जोधपुर व आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में इसका उपयोग हो रहा है। हाल ही में इस तकनीक को लेकर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी, जिसमें इसके लाभों पर चर्चा की गई। लुधियाना में इस तकनीक को सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) में लागू करने के लिए पीडीए के नेताओं के साथ विशेष बैठक हुई। इसके बाद पीडीए ने तकनीक को ट्रायल के रूप में लागू करने पर सहमति दी। बैठक में पीडीए निदेशक कमल चौहान, बॉबी जिंदल, अंकित सिंगला, राजेश बांसल, अरविंद कालड़ा, कुलदीप सहगल, संचित खन्ना, बिट्टू नवकार, रजनीश गुप्ता, सुनील मेगालाइन, राहुल वर्मा, विमल नरनांग, अवतार सिंह, विशाल जैन व गुरप्रीत सिंह जीपी मौजूद रहे।


