डिंडोरी जिले में राघोपुर बहुउद्देशीय परियोजना से प्रभावित मुड़िया कला गांव के किसान बुधवार को बांध निर्माण रद्द करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने एसडीएम भारती मरावी के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर वैद्यनाथ वासनिक को सौंपा। यह ज्ञापन प्रशासन द्वारा जारी व्यक्तिगत सुनवाई के नोटिस के विरोध में दिया गया। ग्राम सभा में पहले ही हो चुका है विरोध प्रस्ताव किसान संघर्ष समिति के सदस्य अमर सिंह मार्को ने बताया कि प्रशासन ने भू-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 21(2)(1) के तहत व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया है, जबकि ग्राम सभा में पहले ही बांध निर्माण रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। इसके विरोध में 1 अक्टूबर 2025 को एक महापंचायत भी आयोजित की गई थी। अनुसूचित क्षेत्र में परियोजना, पेसा नियमों की अनदेखी का आरोप किसानों का कहना है कि परियोजना क्षेत्र पूरी तरह अनुसूचित क्षेत्र में आता है। प्रभावित लोगों में लगभग 99 प्रतिशत आदिवासी और 1 प्रतिशत अन्य वर्ग के हैं। नियमों के अनुसार, ऐसे क्षेत्रों में किसी भी बड़े परियोजना कार्य से पहले ग्राम सभाओं की सहमति आवश्यक है, लेकिन पेसा एक्ट के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। आदिवासी समाज के विस्थापन का मुद्दा उठाया किसान नेताओं ने कहा कि आजादी के बाद सबसे अधिक विस्थापन आदिवासी समाज का हुआ है, जिसकी संख्या 4 से 6 करोड़ के बीच बताई जाती है। इसके बावजूद आदिवासी क्षेत्रों में लगातार बड़े प्रोजेक्ट थोपे जा रहे हैं। विधायक पर लगाए गंभीर आरोप किसानों ने शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि विधायक के पास जिले में हजारों एकड़ जमीन है, लेकिन उनकी भूमि को डूब क्षेत्र में शामिल नहीं किया जा रहा। किसानों का आरोप है कि विधायक को महापंचायत में आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने किसानों की समस्याएं सरकार तक नहीं पहुंचाईं। डिप्टी कलेक्टर से हुई बहस, आश्वासन मिला ज्ञापन सौंपने के दौरान किसान नेताओं और डिप्टी कलेक्टर वैद्यनाथ वासनिक के बीच बांध निर्माण के लिए गठित समितियों को लेकर बहस भी हुई। डिप्टी कलेक्टर ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों और आपत्तियों को शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा। इस दौरान बोध सिंह बालरे, धरम सिंह मसराम, श्याम सिंह, आशाराम, अर्जुन सिंह, राम कुमार सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।


