डिंडौरी में शनिवार शाम से ओंकारेश्वर के नर्मदानंद बाप जी महाराज ने नर्मदा नदी किनारे प्रवचन दिया। नर्मदा परिक्रमा के 78वें दिन उन्होंने नर्मदा मैया की महिमा का बखान किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे स्वच्छता अभियान की सराहना की। आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने की अपील इस दौरान उन्होंने डिंडोरी नगर के लोगों से नर्मदा नदी और अपने आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने की अपील की। महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यभार संभाला है, देश में स्वच्छता को लेकर सराहनीय कार्य हो रहे हैं। उन्होंने विदेशी धरती पर भारत का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पहले स्वच्छता में सूरत शहर का नाम आता था, लेकिन अब इंदौर को लगातार सातवीं बार स्वच्छता अवॉर्ड मिला है। उन्होंने डिंडौरी नगर पालिका अध्यक्ष की भी नर्मदा में स्वच्छता बनाए रखने की इच्छा का उल्लेख किया। लोगों से बोले-स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी सभी उन्होंने आगे कहा कि सरकार केवल निर्माण कार्य कर सकती है, लेकिन स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी हम सभी की है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे केवल नर्मदा ही नहीं, बल्कि अपने घरों के आसपास भी स्वच्छता बनाए रखें। महाराज ने संविधान और मनरेगा योजना में संशोधन कर भगवान राम का नाम जोड़ने पर आपत्ति न होने की बात भी कही। सनातन धर्म के विरोधियों पर भी की टिप्पणी नर्मदानंद बाप जी महाराज ने सनातन धर्म के विरोधियों पर भी टिप्पणी की और राष्ट्र निर्माण के लिए सभी को आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत माता की धर्म ध्वजा विश्व में फहराने और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए एक सिपाही की तरह काम करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वर्तमान स्थिति बनी रही तो भविष्य में देश को फिर से गुलामी का सामना करना पड़ सकता है। देश की 55 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर महाराज ने भारत की कृषि और ऋषि संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की 55 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने ऋषियों द्वारा संस्कृत की मदद से किए गए अनुसंधान और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों के निर्माण का जिक्र किया। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि आक्रमणकारियों ने हमारे वेदों और ग्रंथों को नष्ट करने का प्रयास किया। उन्होंने नर्मदा नदी के महत्व का भी वर्णन किया, जिससे आज गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में पानी पहुंचाया जा रहा है और मध्य प्रदेश में सिंचाई का रकबा 50 हेक्टेयर से बढ़कर 55 लाख हेक्टेयर हो गया है।


