डिग्री नहीं, जज्बा..69 की उम्र में विधायक ने दी परीक्षा:बेटियों ने जिद की तो 40 साल बाद फिर पढ़ाई की, 15 की उम्र में छोड़ी थी पढ़ाई

उदयपुर ग्रामीण के विधायक फूलसिंह मीणा ने उम्र की दीवार को ढहाते हुए शिक्षा जगत में एक नई मिसाल पेश की है। जिस उम्र में लोग अक्सर सक्रिय राजनीति या सामाजिक जीवन से दूरी बनाने लगते हैं, उस उम्र में 69 वर्षीय मीणा ने जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ से राजनीति विज्ञान में एम.ए. (अंतिम वर्ष) की परीक्षा दी है। यह खबर केवल एक डिग्री हासिल करने की नहीं, बल्कि उस संकल्प की है जिसने 40 साल के लंबे अंतराल के बाद एक जनप्रतिनिधि को वापस आम छात्र बनाकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचा दिया। फूलसिंह मीणा की यह शैक्षिक यात्रा संघर्ष और प्रेरणा की कहानी है। महज 15 साल की उम्र में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। लेकिन उनके भीतर सीखने की ललक हमेशा जिंदा रही। उन्हें फिर से किताबों की दुनिया में लाने का श्रेय उनकी पांच उच्च शिक्षित बेटियों को जाता है। बेटियों की प्रेरणा और पत्नी शांति देवी के प्रोत्साहन ने मीणा को 55 वर्ष की उम्र में फिर से कलम थामने का साहस दिया। उनका मानना है कि यदि राजनीति को साफ-सुथरा बनाना है और सुशासन लाना है, तो राजनेता का शिक्षित होना अनिवार्य है। इसी ऊंचे उद्देश्य के साथ उन्होंने राजनीति शास्त्र को ही अपनी उच्च शिक्षा का विषय चुना।
एक सक्रिय विधायक की व्यस्तताओं के बीच पढ़ाई जारी रखना किसी चुनौती से कम नहीं था। उनके सहयोगियों के अनुसार, मीणा जनता की समस्याओं को सुनते हुए और क्षेत्र के दौरों के बीच भी पढ़ाई का समय निकाल लेते हैं। वे अपनी कार में सफर के दौरान ऑडियो नोट्स सुनते हैं और महत्वपूर्ण विषयों को पढ़ते रहते हैं। उनका यह जुनून उनके शिक्षकों को भी हैरान कर देता है। लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए मीणा विधानसभा की जनजाति कल्याण समिति के सभापति भी हैं, फिर भी उन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी पीछे नहीं रहने दिया। विधायक मीणा ने अपनी शिक्षा का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुँचाने का भी बीड़ा उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान से प्रेरित होकर उन्होंने अपने क्षेत्र में एक क्रांतिकारी पहल की है। वे हर साल बोर्ड परीक्षाओं में अव्वल आने वाली छात्राओं को हवाई यात्रा कराते हैं। इस नवाचार ने पूरे क्षेत्र का माहौल बदल दिया है। पहले जहां पढ़ाई को बोझ समझा जाता था, वहीं अब छात्राओं में बेहतर परिणाम लाने की होड़ लगी है। इस पहल से न केवल बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर लगाम लगी है, बल्कि अभिभावक भी बेटियों की उच्च शिक्षा के प्रति जागरूक हुए हैं। अपनी इस उपलब्धि के साथ ही विधायक मीणा ने देश के युवाओं को एक गहरा संदेश दिया है। वे कहते हैं कि शिक्षा केवल डिग्री पाने का जरिया नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा और मानव कल्याण का आधार है। उन्होंने परीक्षाओं के तनाव में आकर आत्महत्या करने वाले युवाओं से अपील की है कि वे चुनौतियों से न घबराएं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि विफलता कभी स्थायी नहीं होतीं और सीखने का द्वार हमेशा खुला रहता है।

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