डीग में मनरेगा बचाओ जन संग्राम आंदोलन:ग्रामीणों, श्रमिकों और कांग्रेसजनों ने चौपाल में संवाद किया

डीग में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर ‘मनरेगा बचाओ जन संग्राम आंदोलन’ चलाया गया। डीग जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजीव सिंह चौधरी और राजस्थान सरकार की पूर्व राज्य मंत्री जाहिदा खान के नेतृत्व में यह अभियान कामां विधानसभा क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में आयोजित हुआ। इसमें गोपालगढ़, खेड़ली नऊआबद, लड़मका, सोतहल्ला, जोतरी पीपल और पापडा शामिल थीं। इस आंदोलन के तहत ग्रामीणों, मनरेगा श्रमिकों और कांग्रेसजनों के साथ चौपालों में संवाद किया गया। इन चौपालों का उद्देश्य मनरेगा योजना से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि यूपीए सरकार ने 2005 में मनरेगा को एक अधिकार-आधारित कानून के रूप में लागू किया था। यह कानून प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी की मांग करने का वैधानिक अधिकार देता है। मनरेगा के तहत राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देना होता है। यह वैधानिक गारंटी मनरेगा की मूल विशेषता है। कांग्रेस नेताओं ने जोर दिया कि कोरोना काल में मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित हुआ और यह प्रतिवर्ष देश भर में 5-6 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए प्रावधान मनरेगा के मूल ढांचे से विचलन हैं। उनके अनुसार, अब काम करने और वाजिब मजदूरी पाने का अधिकार छीना जा रहा है। साथ ही, ग्राम पंचायतों की शक्तियां ठेकेदारों को दी जा रही हैं, जिससे राज्य सरकारें कमजोर हो रही हैं। नेताओं ने यह भी बताया कि मनरेगा की मजदूरी में केंद्र सरकार का योगदान पहले 90% था, जिसे घटाकर अब 60% कर दिया गया है। इससे राज्य सरकारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार के वित्तीय वर्ष 2025-26 के अनुमानित 48 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का हवाला दिया। इसके विपरीत, राजस्थान सरकार का अनुमानित राजस्व लगभग 3 लाख करोड़ रुपए है और उस पर 7.50 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान सरकार के पास आरजीएस (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) की दवाइयों के भुगतान के लिए भी पैसे नहीं हैं, जबकि केंद्र सरकार पर वर्तमान में भी मनरेगा की देनदारियां बकाया हैं।

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