डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस:नक्सलवाद खात्मे की ओर… इस पर छग, आंध्र व ओडिशा के डीजीपी देंगे प्रेजेंटेशन

अखिल भारतीय डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस में शनिवार को नक्सलवाद पर छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा के डीजीपी संयुक्त रूप से प्रेजेंटेशन देंगे। वे बताएंगे किस स्ट्रैटजी से नक्सलवाद खात्मे की ओर पहुंच गया है। डीजीपी के पैनल में आईबी के एक अफसर भी होंगे जो देशभर के नक्सलवाद और उसके खिलाफ लड़ी जा रही जंग की प्लानिंग में शामिल हैं और उनके इनपुट पर ही सभी नक्सल प्रभावित राज्यों में ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस का प्रजेंटेशन ही आईबी के डीजी ने तय किया है। भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि डीजीपी आईजी कांफ्रेंस में सबसे अहम भूमिका आईबी यानी इंटेलिजेंस ब्यूरो की है। क्योंकि इंटरनल सिक्योरिटी यानी देश की आंतरिक सुरक्षा की निगरानी आईबी के जिम्मे है। किस राज्य में कौन कौन से अपराध चुनौती बन रहे हैं और किस तरह के अपराधों को कंट्रोल करने में राज्य सफल हो रहे हैं। आईबी के पास हर राज्य का ब्योरा होता है। इस वजह से डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस के पहले सभी राज्यों के डीजीपी अपने-अपने राज्य का प्रेजेंटेशन आईबी के डीजी को भेजते हैं। नक्सलवाद, नशा, मानव तस्करी और आतंकवाद जैसे प्रमुख मुद्दों चार-पांच डीजीपी का पैनल प्रेजेंटेशन देंगे। पिछले डीजीपी-आईजी कांफ्रेंस के इस सिस्टम को मौजूदा कांफ्रेंस में भी लागू किया गया है। हर पैनल में प्रेजेंटेशन के दौरान जिस मुद्दे को पेश किया जाएगा, उससे संबंधित देशभर में इनपुट जुटाने वाले आईबी के एक अफसर शामिल रहेंगे। प्रेजेंटेशन भी पैनल में शामिल सबसे सीनियर डीजीपी देंगे। पाकिस्तान कनेक्शन, इसलिए छग में नशे को लेकर खतरे की घंटी छत्तीसगढ़ में नशा एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। खासतौर पर पिछले दिनों पकड़े गए गैंग से पाकिस्तान का कनेक्शन मिलने से यहां खतरे की घंटी है। इसलिए डीजीपी कांफ्रेंस में इस मुद्दे को भी शामिल किया गया है। गांजे की तस्करी और कॉरीडोर के लिए छत्तीसगढ़ पहले से देशभर में चर्चा में है। ऐसी चौकसी… अफसरों को जहां ठहराया वहां बगैर पास एंट्री बैन डीजी-आईजी कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाले अफसरों को जगह के हिसाब से अलग-अलग ठहराया गया है। आईजी और डीआईजी रैंक के अधिकारी निमोरा स्थित प्रशासनिक अकादमी के हॉस्टल में हैं। आईबी अफसरों के लिए निमोरा के पीछे स्थित ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान का हॉस्टल चुना गया है। इन दोनों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। गेट पर पहरे के बावजूद पूरे कैंपस के साथ फूल और गमलों की भी मेटल डिटेक्टर से जांच की जा रही है। भास्कर टीम शुक्रवार को जब प्रशासनिक भवन पहुंची, तो जवानों की टीमें मेटल डिटेक्टर से पूरे कैंपस की जांच कर रही थी। जिनकी एंट्री जरूरी है, उन्हें पास जारी किए गए हैं। हालांकि पास होने के बावजूद स्टाफ के आने-जाने का समय गेट के रजिस्टर में नोट किया जा रहा है। सबसे ज्यादा सख्ती ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान में है। यहां बाहरी गेट पर ही दो डीएसपी और टीआई के अलावा हवलदार और जवान तैनात हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *