डीसी ने सरकार को दी गलत रिपोर्ट, कहा- जिले में आदिवासी प्रधान नहीं

जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को गलत रिपोर्ट भेजी कि बोकारो जिला में संताल जाति के मानकी, मुंडा, ग्राम प्रधान, डकुवा आदि नहीं हैं। इसलिए आदिवासी समाज के मांझी बाबा, जोग मांझी, भगलोन, गुड़ैत को मिलने वाली सम्मान राशि किसी को नहीं दी जाती है। जिला प्रशासन ने वैसे आदिवासी लाभुकों की संख्या प्रतिवेदन में शून्य दिखाया गया था। यह मामला विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उठा। इस मामले को निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने विधान सभा में उठाया। उन्होंने रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि बोकारो जिला के प्रतिवेदन में शून्य आदिवासी बताया गया है, जबकि बोकारो जिले में कई आदिवासी गांव हैं। इसके जवाब में विभागीय मंत्री ने बोकारो जिले से पुन: रिपोर्ट मंगवाने की बात कही। इसके बाद डीसी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर गलती सुधारने का प्रयास किया। बैठक में सभी आदिवासी गांवों का सर्वे करने का निर्देश दिया। जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार के संकल्प संख्या 4654 दिनांक 22 नवंबर 2018 के आलोक में बोकारो जिले के मानकी, मुंडा, ग्राम प्रधान, डाकुवा आदि के लिए जिला द्वारा पूर्व में अंचल अधिकारियों से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से संबंधित प्रतिवेदन के अनुसार सम्मान राशि विषयक प्रतिवेदन शून्य प्रतिवेदित किया गया है। विभागीय सूत्रों की मानें, तो पूर्व के रिपोर्ट को ही विभाग को भेज दिया गया था। सर्वे करने के लिए अधिकारियों की टीम बनाई गई डीसी ने कल्याण विभाग के वरीय प्रभारी पदाधिकारी सह अपर समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी आदि को निर्देश दिया कि जिले के संथाल गांवों का सर्वे कराकर संबंधित गांव के मांझी बाबा, जोग मांझी, भगलोन, गुड़ैत आदि को चिह्नित कर प्रतिवेदन जिला को समर्पित करें। साथ ही, अपर समाहर्ता को यह भी निर्देश दिया कि सर्वे प्रतिवेदन प्राप्त करने के बाद जो पूर्व में शून्य प्रतिवेदन भेजा गया था, उसे संशोधित कर यथाशीघ्र राज्य सरकार को भेजना सुनिश्चित करें। बोकारो में संताल आदिवासियों के हैं 125 गांव विधानसभा में मामले उठने के बाद बोकारो डीसी अजय नाथ झा ने बुधवार को इस संबंध में विशेष बैठक की। समीक्षा बैठक में यह बताया गया कि जिले में संथाल आदिवासियों के लगभग 125 गांव हैं। इनमें संथाल जनजाति के लोग निवास करते हैं। प्रत्येक गांव पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत है और सभी पंचायत में एक मुखिया भी है। डीसी ने यह भी बताया गया कि जिले के ललपनिया के विभिन्न संथाल गांव में फेनीराम सोरेन, मंझला मुर्मू, सुंदर लाल मरांडी, मटुक कुमार हांसदा, बाबुचंद मांझी आदि लोग मांझी बाबा के रूप में कार्य कर रहे हैं। लुगू पहाड़ में लगता है देश का सबसे बड़ा मेला ललपनिया के लुगू पहाड़ पर लुगू बुरू घंटा बाड़ी में आदिवासियों का देश का सबसे बड़ा मेला लगता है। यहां विदेशों से भी आदिवासी आते हैं और लुगू बाबा की पूजा करते हैं। इस वर्ष नवंबर में हुए दो दिवसीय मेला का उद्घाटन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया था। डीसी-एसपी सहित जिला प्रशासन के सभी अधिकारी थे। बावजूद इसके इतनी बड़ी गलती कि बोकारो में आदिवासी समाज के मांझी बाबा, जोग मांझी, भगलोन, गुड़ैत आदि नहीं हैं। इसकी रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई। यह सवाल जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। बैठक करते डीसी व एसी।

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