डूंगरपुर शहर के राजकीय महारावल स्कूल के पीछे बना कृषि प्रयोगशाला भवन 12 साल में ही जर्जर हो गया है। कृषि विद्यार्थियों की प्रैक्टिकल पढ़ाई के लिए बनाया गया यह भवन अब गोदाम के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। भवन की दीवारों और छत से पानी रिसता है, जिससे मलबा गिरने का खतरा बना रहता है। यह प्रयोगशाला भवन वर्ष 2013 में विधायक मद से 39.50 लाख रुपये की लागत से निर्मित किया गया था। इसमें आधुनिक कृषि उपकरणों के साथ विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई थीं, ताकि कृषि विषय के छात्रों को बेहतर प्रायोगिक शिक्षा मिल सके।
हालांकि, निर्माण के कुछ समय बाद ही भवन में पानी के भराव की समस्या शुरू हो गई। इस कारण भवन की नींव कमजोर हो गई और दीवारों में दरारें आ गईं। वर्तमान में स्थिति यह है कि प्रयोगशाला में विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल कराना जोखिम भरा हो गया है। सुरक्षा कारणों से अब कृषि विषय के विद्यार्थियों को कक्षा कक्षों में ही पढ़ाया जा रहा है। स्कूल में कृषि विषय में कुल 220 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें कक्षा 11 में 108 और कक्षा 12 में 112 छात्र शामिल हैं। पहले इन विद्यार्थियों को इसी प्रयोगशाला में प्रायोगिक कार्य कराया जाता था। इस संबंध में जब महारावल स्कूल के प्रिंसिपल हरीशचंद्र रोत से बात की गई, तो उन्होंने भवन के खस्ताहाल होने की बात से इनकार करते हुए हकीकत छिपाने का प्रयास किया। हालांकि, भवन की वर्तमान स्थिति उसके जर्जर होने का स्पष्ट प्रमाण देती है।


