डेढ़ साल के बच्चे की आंख में चार्जर पिन लगी:मासूम को लेकर अस्पतालों में भटकते रहे परिजन, हमीदिया में बचाई रौशनी

हरदा के डेढ़ साल के बच्चे की घर पर खेलते समय आंख में मोबाइल चार्जर की पिन घुस गई। माता-पिता उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल ले गए, जहां हालत गंभीर देख भोपाल रेफर कर दिया गया। शनिवार शाम 7 बजे भोपाल पहुंचे परिजन शहर के तीन बड़े अस्पतालों में भटकते रहे, लेकिन सभी ने इमरजेंसी सर्जरी से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि डॉक्टर जा चुके हैं और रविवार को छुट्टी रहेगी। परिजन 3 से साढ़े 3 घंटे भटकने के बाद हमीदिया अस्पताल पहुंचे। इमरजेंसी विभाग के डॉक्टर ने बच्चे की स्थिति देखते ही कॉर्निया स्पेशलिस्ट डॉ. भारती आहूजा को सूचना दी। वे तुरंत अस्पताल पहुंचीं और बच्चे की जांच कर उसे भर्ती किया। परिजन की अनुमति मिलने के बाद सर्जरी की तैयारी शुरू की गई। छह घंटे की तैयारी के बाद रविवार सुबह-सुबह सफल सर्जरी कर बच्चे की आंख की रोशनी बचाई गई। ऑपरेशन में देरी से रोशनी जाने का था खतरा
कॉर्निया स्पेशलिस्ट डॉ. भारती आहूजा ने बताया कि बच्चे की जांच में कॉर्नियल टियर की समस्या देखने को मिली थी। इस स्थिति में सर्जरी देर से होने पर इन्फेक्शन का खतरा रहता है, जो आगे चलकर किसी गंभीर परेशानी का कारण बन सकता था। बच्चा सिर्फ डेढ़ साल का है। ऐसे में उसकी सर्जरी के लिए जनरल एनेस्थीसिया देना पड़ा। हमने एनेस्थीसिया विभाग की टीम से मदद मांगी। उनके सहयोग से और नेत्र विभाग व इमरजेंसी विभाग के स्टाफ की मदद से बच्चे की आंख की सर्जरी 20 मिनट में पूरी की गई। पिता बोले- भोपाल में दिनभर भटके
मरीज के पिता ने कहा कि भोपाल में हम बच्चे के इलाज के लिए शनिवार को दिनभर भटके थे। जब हम अंत में हमीदिया अस्पताल पहुंचे तो यह 6 घंटे के अंदर जांच से लेकर सर्जरी तक हो गई। यदि, हम सीधे हमीदिया अस्पताल आते तो हमारा बच्चे को इतनी तकलीफ ना झेलनी पड़ती। बच्चों की सुरक्षा के लिए सावधानी इमरजेंसी में क्या करें? दो दिन बाद खुलेगी पट्टी
बच्चे की आंख में फिलहाल पट्टी बंधी हुई है। डॉ. आहूजा ने बताया कि दो दिन के बाद इसे खोला जाएगा, जिसके बाद आंखों की अंतिम जांच की जाएगी। रिपोर्ट सही आने के बाद बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *