भास्कर न्यूज | राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेजर ऑपरेशन थियेटर में ईगल प्रोजेक्ट के तहत लैप्रोस्कोपिक वर्कशॉप का आयोजन किया गया। वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य विभाग के डॉक्टरों और और डीएनबी मेडिकल के छात्र-छात्राओं को लैप्रोस्कोपिक पद्धति में प्रशिक्षित करना था। इस वर्कशॉप में डॉक्टरों ने तीन महिलाओं की निशुल्क लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की। वर्कशॉप में लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अश्विनी कल्याणकर मुंबई से, डॉ. उमा त्रिपाठी रायपुर से, डॉ. किशन चिरानिया ने भिलाई से मौजूद रहे। गर्भवतियों का प्रसव होने के बाद किसी दूसरी तरह की बीमारी और समस्या से बचाव के लिए लेप्रोस्कोपी सर्जरी करने की जरूरत पड़ती है। मरीज की कंडिशन अनुसार जरूरत पड़ने पर इस सर्जरी के माध्यम से डॉक्टरों द्वारा सुरक्षित ढंग से गर्भाशय को निकाल दिया जाता है। इसके अलावा पथरी की समस्या एवं लेप्रोस्कोपी सर्जरी की जरूरत पड़ती है। लेप्रोस्कोपी टेलीस्कोपी रॉड लैंस प्रणाली एवं डिजिटल लेप्रोस्कोप है। अंगों को देखने लंबी, पतली ट्यूब होती है। सर्जरी टीम में डॉ. स्मृति जनबंधु निश्चेतना विभाग, डॉ. कवि, विद्याधर, वर्षा, प्रमोद, अन्विता, जिज्ञासा की भूमिका रही। प्रसुति रोग विभाग से डॉ. अंबालिका, डॉ. विशेष, अंशुमाला, खिलेश्वरी, तृप्ति, रुखसाना, सर्जरी से सुनीता मेश्राम, आराधना टोप्पो मौजूद रही। बीमारी का निदान करने डॉक्टरों ने की लेप्रोस्कोपी डॉक्टरों ने बताया कि लेप्रोस्कोपी का उपयोग आंतरिक अंगों को देखकर या छोटे उत्तकों का नमूना लेकर बीमारी का निदान करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा एक ही समय में ऑपरेशन से किसी समस्या का इलाज करने किया जाता है। कार्यक्रम का आयोजन ईगल प्रोजेक्ट फॉगसी अध्यक्ष डॉ. सुनीता तंदुलवाडकर, डॉ. सेजल नाइक चेयरपर्सन एंडोस्कोपी कमेटी, डॉ. सुभाष माल्या, डॉ. कल्याण बारमदे, डॉ. सुजल मुंशी, डॉ. रितु जैन आईएजीई, ओम सर्जिकल के सहयोग से किया गया।


