विक्की कुमार | अमृतसर इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना रविवार देर रात सामने आई। रणजीत एवेन्यू स्थित रेड क्रॉस द्वारा संचालित पंघूड़े में परिजन 2 महीने के मासूम बच्चे को छोड़कर चले गए। हैरान करने वाली बात है कि बच्चा हाइड्रोकेफेलस जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है फिर भी उसे ठिठुरती रात में नग्न अवस्था में पंघूड़े में छोड़ दिया गया। जब रेड क्रॉस के अधिकारियों को पंघूड़े में बच्चे की सूचना मिली तो तुरंत कार्रवाई करते हुए अपने संरक्षण में लिया और प्राथमिक सहायता के बाद जीएनडीएच भिजवाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद पुष्टि की है कि बच्चा हाइड्रोकेफेलस बीमारी से ग्रस्त है, जिसमें दिमाग में पानी भर जाता है और सिर का आकार असामान्य रूप से बढ़ने लगता है। फिलहाल बच्चा जिंदगी और मौत के बीच जूझ कर रहा है। डॉक्टरों की टीम मंगलवार को बच्चे की न्यूरो सर्जरी करेगी, जिसमें उसके दिमाग में शंट डाला जाएगा, ताकि अतिरिक्त द्रव को बाहर निकाला जा सके। सिर का वजन करीब 3 किलो है और डाक्टरों के मुताबिक बच्चा करीब 2 माह का ही है। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. कर्मजीत सिंह। रेड क्रॉस के कार्यकारी सेक्रेटरी सैमसन मसीह का कहना है कि इस मामले पर डिप्टी कमिश्नर ने भी खास तौर पर नजर रखी हुई है। वह ़डाक्टरों से हर अपडेट ले रहे हैं। उनका कहना है कि इलाज में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर हर संभव सहायता की जाएगी। प्रशासन अपना पूरा जोर लगाएगा कि बच्चा पूरी तरह से ठीक हो जाए। गुरु नानक देव अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. कर्मजीत सिंह का कहना है कि बच्चे की हालत काफी नाजुक बनी हुई है। बच्चा हाईड्रोकेफेलस बीमारी से पीड़ित है और मंगलवार को उसकी न्यूरो सर्जरी करके शंट डाला जाएगा। जिससे बच्चे के सिर में जमा हुआ पानी शंट के माध्यम से पेट में आएगा और उसे धीरे-धीरे निकाला जाएगा। उनका कहना है कि यह बीमारी काफी गंभीर होती है और इसका उपचार भी है। कुछ लोग समझते हैं कि इस बीमारी का ईलाज नहीं है। इस बीमारी के इ लाज में 2 से ढ़ाई लाख तक का खर्च आता है। एमएस ने बताया कि यह बीमारी जन्मजात भी हो सकती है और बाद में भी किसी कारण से हो सकती है। बच्चे के इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। पूरे मामले पर खुद नजर रख रहे हैं। डीसी दलविंदरजीत सिंह भी लगातार अस्पताल प्रशासन और रेड क्रॉस अधिकारियों से बच्चे की सेहत की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। एक ओर जहां यह मासूम अपने माता-पिता के साए के बिना जिंदगी की जंग लड़ रहा है, वहीं यह घटना पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर रही है कि बीमारी से जूझ रहे बच्चों को अपनाने और सहारा देने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। भरी सर्दी में छोड़ा गया यह नन्हा अब प्रशासन और डॉक्टरों के सहारे जिंदगी से जंग लड़ रहा है। बता दें जिला प्रशासन द्वारा स्थापित रेड क्रॉस पंघूड़ा वर्षों से बेसहारा बच्चों के लिए सहारा बना हुआ है, लेकिन यह पहला मामला है, जब इतनी गंभीर बीमारी से पीड़ित 2 माह का बच्चा यहां छोड़ा गया है।


