शाजापुर में सिहोदा-खेड़ा गांव के किसानों ने शासकीय तालाब के पानी के इस्तेमाल को लेकर विवाद की शिकायत की है। शनिवार दोपहर ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और एसडीएम मनीषा वास्कले को ज्ञापन सौंपा। किसानों का आरोप है कि उन्हें सिंचाई के लिए तालाब का पानी लेने से रोका जा रहा है और जान से मारने की धमकी दी गई है। तालाब के पानी को लेकर किसानों का विवाद किसानों ने अपने आवेदन में बताया कि उनकी कृषि भूमि सिहोदा गांव में है, जहां गेहूं की फसल खड़ी है और उसे सिंचाई के लिए पानी की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल शासन की ओर सिंचाई विभाग के माध्यम से गांव में एक बांध (डेम) का निर्माण कराया गया था, जिसका पहले इस्तेमाल सभी किसान सिंचाई के लिए करते थे। सरपंच और उनके साथियों पर धमकी देने का आरोप किसानों के अनुसार, बांध बनने के बाद से सरपंच अशोक पिता दयाराम और कुछ अन्य व्यक्तियों ने पानी का उपयोग केवल अपने और अपने परिचितों तक सीमित कर दिया है। किसानों ने आरोप लगाया कि 9 जनवरी को जब वे बांध से पानी लेने पहुंचे, तो उन्हें गाली-गलौज की गई और बंदूक दिखाकर जान से मारने की धमकी दी गई। खेतों में लगी फसलें सूखने की कगार पर किसानों ने यह भी बताया कि मौके पर पहुंचे राजस्व अधिकारियों ने बांध के पानी पर सभी किसानों का समान अधिकार बताया था, लेकिन विपक्षी पक्ष ने उनकी बात नहीं मानी। उनका कहना है कि बांध में पर्याप्त पानी होने के बावजूद गेट बंद कर दिए गए हैं, जिससे उनकी फसलें सूखने की कगार पर हैं। किसानों ने एसडीएम से मांग की है कि संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि सभी किसानों को बांध का पानी उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी गेहूं की फसलें बचाई जा सकें।


