करौली के ऐतिहासिक तीन दरवाजा तालाब की सालों से टूटी पड़ी पाल की मरम्मत का काम जून में शुरू होते ही रुक गया है। प्रशासन बारिश का हवाला देकर केवल आश्वासन दे रहा है, जबकि शहरवासियों की समस्या जस की तस बनी हुई है। शहर की धरोहर माने जाने वाले रियासतकालीन इस तालाब की पाल लंबे समय से जर्जर हालत में है। नगर परिषद ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर मरम्मत शुरू करवाई थी, लेकिन पहली ही बारिश के बाद काम बंद कर दिया गया। अब कई हफ्ते बीत चुके हैं, मगर निर्माण दोबारा शुरू नहीं हो पाया है। कार्यवाहक आयुक्त द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सुरक्षा दीवार लगभग 80 फीट लंबी और 18-20 फीट ऊंची बनाई जानी है। हालांकि, जमीन पर अभी तक इसकी कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बहानेबाजी का खामियाजा उन्हें हर साल भारी जलभराव झेल कर भुगतना पड़ता है। इतिहास के अनुसार, इस तालाब में रणगमन तालाब का ओवरफ्लो और वर्षा का पानी आता है, जिससे आस-पास के जलस्रोत रिचार्ज होते हैं। लेकिन 2016, 2018 और 2024 जैसी अतिवृष्टियों में जर्जर पाल के कारण निचले क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ था। इसके बावजूद पाल को सुधारने में लगातार देरी होना लोगों की नाराजगी बढ़ा रहा है। चारदीवारी निर्माण के लिए 26 लाख रुपए का टेंडर 15 प्रतिशत कम दर पर स्वीकृत हुआ था। एसडीएम व कार्यवाहक आयुक्त प्रेमराज मीना का कहना है कि तालाब के निचले हिस्सों में जलभराव होने से काम रुका है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मिट्टी डालकर रास्ता साफ होने पर कार्य फिर शुरू कराया जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन हर बार ऐसे ही दावे करता है, जबकि वास्तविक काम महीनों तक लटका रहता है। निवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि मरम्मत की गति ऐसी ही रही, तो आगामी मानसून में भी स्थिति में कोई सुधार नहीं होगा। उन्हें हर साल की तरह इस बार भी पानी भराव और बदइंतजामी का सामना करना पड़ेगा।


