दरगाह फातमान में बुधवार की शाम Husain Day मनाया गया। यह प्रोग्राम शाम 4 बजे शुरू होकर रात 11 बजे तक चलता रहा। इसमें लखनऊ से आये दो मौलानाओं। मशहूर नौहाख्वान अमीर हसन आमिर और कई शायरों ने अपना कलाम पेश किया। प्रोग्राम में इमाम हुसैन के जीवन पर उलेमाओं ने प्रकाश डाला और सभी से उनके जीवन को आत्मसात करने का आह्वान किया। मौलाना वसी हसन खां ने पढ़ी पहली मजलिस दरगाह फातमान में मनाया गया Husain Day लखनऊ से आये मौलाना ने किया इमाम हुसैन का जिक्र, मशहूर नौहाख्वान अमीर हसन आमिर ने पढ़ा नौहा दरगाह फातमान में बुधवार की शाम Husain Day मनाया गया। यह प्रोग्राम शाम 4 बजे शुरू होकर रात 11 बजे तक चलता रहा। इसमें लखनऊ से आये दो मौलानाओं। मशहूर नौहाख्वान अमीर हसन आमिर और कई शायरों ने अपना कलाम पेश किया। प्रोग्राम में इमाम हुसैन के जीवन पर उलेमाओं ने प्रकाश डाला और सभी से उनके जीवन को आत्मसात करने का आह्वान किया। मौलाना वसी हसन खां ने पढ़ी पहली मजलिस
इस प्रोग्राम एक शुरू होने के बाद कई शायरों ने अपना कलाम पेश किया। इसके बाद मगरिब की नमाज के ठीक बाद मौलाना वसी हसन खां ने मजलिस को खेताब फरमाया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन यदि यजीद की बैयत कर लेते तो इस्लाम खत्म हो जाता। ऐसे में उन्होंने ऐसी बैयत (समझौता ) नहीं की और यजीद ने कर्बला के मैदान में उन्हें तीन दिन का भूखा और प्यासा रख कर उनकी हत्या करवा दी गई। लखनऊ के मौलाना बेलाल काजमी ने भी पढ़ी मजलिस
इस मजलिस फौरन बाद मौलाना बेलाल काजमी ने मजलिस पढ़ी। मौलाना ने इमाम हुसैन और उनके सहाबियों (दोस्त) का जिक्र किया उन्होंने कहा इमाम हुसैन के साथ सभी साथी बहादुर थे। सभी ने इमाम हुसैन से पहले मरने की कसम खाई और कहा था कि सब करेंगे पर इमाम हुसैन की ओर एक भी तीर आने नहीं देंगे। जंग जब शुरू हुवी तो लोग एक-एक करके हर जगह जाते हैं।
लखनऊ के मौलाना बेलाल काजमी ने भी पढ़ी मजलिस
इस मजलिस फौरन बाद मौलाना बेलाल काजमी ने मजलिस पढ़ी। मौलाना ने इमाम हुसैन और उनके सहाबियों (दोस्त) का जिक्र किया उन्होंने कहा इमाम हुसैन के साथ सभी साथी बहादुर थे। सभी ने इमाम हुसैन से पहले मरने की कसम खाई और कहा था कि सब करेंगे पर इमाम हुसैन की ओर एक भी तीर आने नहीं देंगे। जंग जब शुरू हुवी तो लोग एक-एक करके हर जगह जाते हैं।


