दर्दनाक घटना:3 माह पहले पिता ने बेटे को किडनी देकर बचाई थी जिंदगी, बीमारी से परेशान हो छठी मंजिल से कूदा, मौत

सुबह हंसराज ने 7:30 बजे चाय पी, 8:30 बजे दूध पीया। 9:30 बजे छलांग लगा दी। 70 फीट ऊंचाई से कूदन के बाद वह नीचे पोर्च में गिरा। एसएमएस अस्पताल के 7 मंजिला सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में गुरुवार को दर्दनाक घटना सामने आई। किडनी की बीमारी से जूझ रहा टोंक जिले के ठोरिया पचेवर निवासी 36 वर्षीय हंसराज जाट इलाज के दौरान छठी मंजिल की खिड़की से नीचे कूद गया। मौके पर मौजूद सुरक्षा गार्ड और अस्पताल स्टाफ ने उसे तुरंत ट्रोमा सेंटर पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि हंसराज पिछले 7 दिनों से सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के ट्रांसप्लांट वार्ड में भर्ती था। बीमारी के चलते वह मानसिक रूप से परेशान था। हालांकि, परिजनों और डॉक्टरों के मुताबिक उसके व्यवहार में किसी तरह की असामान्य स्थिति नजर नहीं आ रही थी। पिता बोले- मैंने अपनी जिंदगी दे दी थी…, अब सब बिखर गया बेटे की मौत की खबर सुनते ही गोगाराम बेहोश होकर गिर पड़े। कुछ देर तक वे बोल भी नहीं पा रहे थे। उन्होंने कहा वह ट्रांसप्लांट वार्ड में बेटे के साथ ही था। मैंने उसे दूध पिलाया था। फिर थकान के कारण पास रखी टेबल पर बैठे-बैठे आंख लग गई। जब आंख खुली तो पता चला कि वह खिड़की से नीचे कूद गया है। पता ही नहीं चला कि वह कब उठा और कब नीचे कूद गया। मैंने तो अपनी किडनी देकर उसे नई जिंदगी दी थी। भगवान को कुछ और ही मंजूर था, यह कहते-कहते उनकी आंखें आईं। नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. धनन्जय अग्रवाल ने बताया कि हंसराज का करीब तीन महीने पहले, 23 सितंबर 2025 को किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। उसके पिता गोगाराम ने अपनी किडनी दान कर बेटे की जान बचाई थी। ट्रांसप्लांट के बाद वह नियमित जांच और इलाज के लिए एसएमएस अस्पताल आ रहा था। उसे एंटी-रिजेक्शन थैरेपी दी जा रही थी और बेहतर इलाज के लिए दिल्ली व अहमदाबाद से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों से भी परामर्श लिया गया था। बीमारी में धैर्य-सकारात्मक माहौल बनाए रखे परिजन: मनोचिकित्सक एसएमएस अस्पताल के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक त्यागी के अनुसार लंबे समय से गुर्दे की बीमारी में क्रिएटिनिन व यूरिया बढ़ा रहता है, जिससे मानसिक संतुलन प्रभावित होता है। किडनी ट्रांसप्लांट मरीजों में बार-बार डायलिसिस और एंटी-रिजेक्शन दवाएं भी दुर्लभ मामलों में मानसिक असंतुलन पैदा कर सकती हैं। कई बार मरीज अचानक गलत निर्णय ले लेता है। ऐसे मामलों में मरीज व परिजनों को धैर्य रखना और सकारात्मक माहौल बनाए रखना जरूरी है। ​किडनी ट्रांसप्लांट से कर्ज का बोझ हंसराज परिवार का कमाऊं बेटा था और उस पर परिवार की जिम्मेदारी थी। उसके 7 साल की बेटी और 3 साल का बेटा जितेश है। वह 22 गोदाम क्षेत्र की एक निजी कंपनी में काम करता था। परिजनों के अनुसार, किडनी ट्रांसप्लांट के लिए परिवार ने कर्ज लिया था। उम्मीद थी कि हंसराज ठीक होकर सब संभाल लेगा, लेकिन सब कुछ खत्म हो गया। अस्पताल में ऐसी घटना का मुझे दुख है। इंसान का दो तौन माह पहले किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। पिता ने बेटे को किया होनेट की थी। यह दिखाने के लिए आया था। ऐसी घटना रोकने के लिए सुख्खा के और इंतजाम किए जाएंगे। -डॉ. नचिकेत व्यास, अर्थक्षक, सुरस्यास्टिक

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