बारां में प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति और जिला रिटेल केमिस्ट समिति ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. संजीव सक्सेना को दिया गया। ज्ञापन में मेडिकल स्टोर लाइसेंस के लिए वाणिज्यिक भूमि की अनिवार्यता पर पुनर्विचार और राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत पिछले आठ माह से लंबित भुगतान को शीघ्र जारी करने की मांग की गई है। दवा विक्रेताओं ने ज्ञापन में बताया कि मेडिकल स्टोर के नए लाइसेंस और नवीनीकरण के लिए वाणिज्यिक भूमि की अनिवार्यता लागू होने से प्रदेश के हजारों मेडिकल स्टोर प्रभावित होंगे। वर्तमान में अधिकांश दुकानें आवासीय या मिश्रित भूमि पर संचालित हैं। छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में वाणिज्यिक भूमि की सीमित उपलब्धता के कारण नई दुकान खोलना या पुरानी का नवीनीकरण कराना मुश्किल हो जाएगा। जिला प्रभारी किशन शर्मा ने कहा कि इस निर्णय से बेरोजगारी बढ़ेगी और कई मेडिकल स्टोर संचालकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न होगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस निर्णय पर पुनर्विचार कर पूर्ववर्ती नियमों को ही लागू रखा जाए, ताकि आमजन को दवाइयां आसानी से मिले। इसके अतिरिक्त, दवा विक्रेताओं ने आरजीएचएस योजना के अंतर्गत भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया। कोषाध्यक्ष एवं जिला प्रभारी किशन शर्मा ने बताया कि एमओयू के अनुसार पंजीकृत दवा विक्रेताओं को 21 दिनों के भीतर भुगतान किया जाना चाहिए, लेकिन पिछले आठ माह से भुगतान लंबित है। इस देरी से दवा विक्रेताओं की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है और होलसेल दवा विक्रेता भी उन्हें दवाइयां देने से हिचकिचा रहे हैं, जबकि आरजीएचएस लाभार्थियों को दवाइयां उपलब्ध कराना उनकी बाध्यता है। ज्ञापन सौंपने वालों में जिला रिटेल केमिस्ट समिति के अध्यक्ष लोकेश तिवारी, महासचिव धनराज सुमन, कोषाध्यक्ष किशन शर्मा, संरक्षक सौरभ भार्गव, इकबाल हुसैन, हेमंत गुप्ता और गुलशन अदलखा सहित अन्य दवा विक्रेता मौजूद थे।


