भास्कर न्यूज | जालंधर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, नूरमहल में मासिक कार्यक्रम का आयोजन बड़े श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक प्रार्थना से हुआ, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिकता से ओतप्रोत हो गया। मंच संचालन स्वामी परमानंद ने किया। उन्होंने भजनों की शृंखला को सुंदरता से आगे बढ़ाते हुए श्रद्धालुओं को भक्तिरस में डुबो दिया। इसके बाद साध्वी मातंगी भारती ने गुरु पर दृढ़ विश्वास रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इतिहास के उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि शिष्यत्व की परख तब होती है जब कोई व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने मार्ग से विचलित न हो। शिष्य होने का अर्थ केवल अपने या अपने परिवार के लिए शुभ कार्य करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी निभाना है। अत्यधिक लोभ या लालच मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है, क्योंकि इच्छाओं का कोई अंत नहीं होता। उन्होंने श्रद्धालुओं से इस दीपावली कृत्रिम लाइटों की जगह दीपक जलाने, सिंथेटिक रंगों की जगह हल्दी और चावल के आटे से रंगोली बनाने की अपील की। कार्यक्रम में शामिल भक्त।


