भास्कर न्यूज | अमृतसर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा वेरका बाइपास स्थित आश्रम में सत्संग आयोजित किया गया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी वीरेश भारती ने अपने गहन और चिंतनशील प्रवचनों से संगत को मंत्रमुग्ध किया। साध्वी ने कहा कि जैसे शरीर की ताकत के लिए भोजन महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार आत्मा के संतुलन के लिए प्रार्थना अत्यावश्यक है। ने कहा कि आत्मा के संतुलन के लिए प्रार्थना एक अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भोजन शरीर की शक्ति के लिए आवश्यक है, लेकिन आत्मा को सशक्त बनाने के लिए प्रार्थना ही वह माध्यम है जो मनुष्य को उसकी आंतरिक सच्चाई से जोड़ती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रोजाना की प्रार्थना मात्र एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह आत्मिक ऊर्जा को बढ़ाने का एक प्रभावी जरिया है। जैसे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम और पोषक भोजन जरूरी होता है, वैसे ही मन को शांति और सच्चाई से भरने के लिए नित्य प्रार्थना करना आवश्यक है। साध्वी ने उदाहरण देकर समझाया कि जैसे शरीर की तंदुरुस्ती के लिए सही आहार और व्यायाम आवश्यक हैं, उसी प्रकार मन को शांति और सत्य की ऊर्जा से भरने के लिए दिनचर्या में प्रार्थना को शामिल करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रार्थना केवल एक मौखिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह एक आंतरिक यात्रा है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है। साध्वी ने बताया कि प्रार्थना बाहरी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आंतरिक अनुभव है जो आत्मा को परमात्मा के साथ एकाकार करने में सहायक होता है। जब मनुष्य की अंतरात्मा उस परम पिता से जुड़ती है, तभी सच्ची, निर्मल और संतुलित प्रार्थना का जन्म होता है। इस प्रार्थना रूपी क्रिया से मनुष्य की जीवन यात्रा, जो अक्सर चिंताओं और भ्रमों से भरी होती है, शांति और संतुलन से सज जाती है। साध्वी ने संगत को प्रेरित किया कि वह अपने हर दिन की शुरुआत और अंत एक सच्ची और निर्भर प्रार्थना से करें। इस सत्संग में कई भक्तजन मौजूद थे।


