2000 वर्गफीट तक के प्लॉट पर दी जाती है डीम्ड परमिशन 2000 वर्गफीट के प्लॉट पर डीम्ड बिल्डिंग परमिशन का दुरुपयोग हो रहा है। अवैध कालोनियों में भी लोग डीम्ड परमिशन ले रहे हैं और डेवलपमेंट चार्ज की गणना भी गलत हो रही है। शिकायतों के बाद नगर निगम कमिश्नर ने हर परमिशन की जांच के निर्देश दिए हैं। डीम्ड परमिशन की व्यवस्था लागू होने के बाद से लगभग 50 फीसदी परमिशन इसी से हो रही है। बिल्डिंग परमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन में जब डीम्ड परमिशन के लिए आवेदन करते हैं तो उसमें सिस्टम पूछता है कॉलोनी वैध है या अवैध। लेकिन अवैध कॉलोनी को वैध बता दिया जाए तो भी बिल्डिंग परमिशन जारी हो जाती है। डेवलपमेंट चार्ज की गणना में भी गड़बड़ी हो रही है, क्योंकि सिस्टम में सभी कालोनियों के डेवलपमेंट चार्ज दर्ज नहीं है। अब तक डीम्ड बिल्डिंग परमिशन को क्रॉस चैक करने की कोई व्यवस्था नहीं है। नगर निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण ने पिछले दिनों समीक्षा के बाद अब नगर निगम के इंजीनियरों को डीम्ड परमिशन क्रॉस चैक करने को कहा है। जानिए… इन तीन तरीकों से होती है बिल्डिंग परमिशन पहला : नगर निगम के रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट द्वारा बिल्डिंग परमिशन जारी की जाती है। इसके संबंध में प्लॉट और प्लॉट मालिक की पूरी जानकारी से लेकर फीस की रसीद काटने की जिम्मेदारी आर्किटेक्ट की होती है। आर्किटेक्ट की जिम्मेदारी होती है कि नक्शे समेत पूरा रिकॉर्ड बिल्डिंग परमिशन शाखा को उपलब्ध कराए। दूसरा : नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा की ओर से बिल्डिंग परमिशन जारी की जाती है। आवेदक प्लॉट मालिक होता है। आर्किटेक्ट की ओर से उन्हें टेक्निकल सपोर्ट दिया जाता है। बिल्डिंग परमिशन का अमला आवेदन की पड़ताल करके बिल्डिंग परमिशन जारी करता है। तीसरा : 2000 वर्गफीट तक के प्लॉट पर डीम्ड बिल्डिंग परमिशन यानी घर बैठे परमिशन दी जाती है। इसके लिए आवेदक को विभाग के पोर्टल एबीपीएस2 पर आवेदन करना होता है। पूरी जानकारी दर्ज करने पर परमिशन जारी होती है। दिसंबर में 580 बिल्डिंग परमिशन : शहर में दिसंबर में कुल 580 बिल्डिंग परमिशन हुईं। इनमें से 295 परमिशन डीम्ड थीं और प्राइवेट आर्किटेक्ट ने 185 परमिशन दीं। अगर इन दोनों को जोड़ लें तो 580 में से से 480 यानी 83 प्रतिशत परमिशन ऐसी हैं जो निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा के माध्यम से नहीं हुईं। नगर निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण ने कहा कि डीम्ड परमिशन और आर्किटेक्ट की परमिशन में गड़बड़ियों को लेकर उनके पास कई शिकायतें आती हैं। उन्होंने इंजीनियरों को इसकी जांच करने को कहा है, लेकिन यह भी ध्यान रखने को कहा है कि बिना वजह लोगों को परेशान नहीं किया जाए, क्योंकि सरकार ने आम लोगों की सुविधा के लिए यह व्यवस्था लागू की है। आर्किटेक्ट की परमिशन की भी होगी जांच निगम के इंजीनियर प्राइवेट आर्किटेक्ट द्वारा दी जा रही परमिशन और उस आधार पर हो रहे निर्माण कार्य की भी जांच करेंगे। प्राइवेट आर्किटेक्ट द्वारा दी जाने वाली परमिशन और उसके आधार पर हो रहे निर्माण को लेकर आई शिकायतों के बाद ज्यादातर के कंसोल बंद हो गए हैं। फिलहाल केवल 7 प्राइवेट आर्किटेक्ट ही यह परमिशन दे रहे हैं। गलत जानकारी दर्ज कर अवैध कॉलोनियों में बिल्डिंग परमिशन जारी नहीं हो, इसके लिए बिल्डिंग परमिशन के क्षेत्रीय अधिकारियों को जिम्मेदारी है कि वे आवेदनों का रिकॉर्ड से मिलान करें। गलत परमिशन जारी होती है तो उस क्षेत्र के इंजीनियर की जिम्मेदारी होगी। -हरेंद्र नारायण, कमिश्नर, नगर निगम


