पंजाब सरकार द्वारा 21 दिसंबर से दूध की कीमतों में 20 रुपए प्रति फैट की कटौती की गई है। इस फैसले से प्रदेशभर के डेयरी किसानों में भारी रोष है। प्रोग्रेसिव डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन (PDFA) ने इस कटौती को डेयरी सेक्टर के लिए हानिकारक बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। PDFA के प्रमुख दलजीत सिंह सदारपुरा ने बताया कि पंजाब देश के प्रमुख डेयरी उत्पादक राज्यों में से एक है। हाल के वर्षों में कई शिक्षित युवाओं ने विदेश जाने के बजाय डेयरी फार्मिंग को चुना है। इन युवाओं ने लाखों रुपए का कर्ज लेकर आधुनिक डेयरी फॉर्म स्थापित किए हैं। सरकार के इस फैसले से उनके भविष्य पर अनिश्चितता छा गई है। किसानों को होगा नुकसान सदारपुरा ने यह भी बताया कि इस कटौती के लागू होने से किसानों को गाय के दूध पर लगभग एक रुपए प्रति लीटर और भैंस के दूध पर करीब डेढ़ रुपए प्रति लीटर का सीधा नुकसान होगा। पहले से ही आर्थिक दबाव का सामना कर रहे किसानों के लिए यह निर्णय डेयरी फार्मिंग को घाटे का सौदा बना देगा। PDFA ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र PDFA ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि चारा, फीड, डीजल, बिजली, मजदूरी, पशु चिकित्सकों की फीस और दवाइयों की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके विपरीत, दूध की कीमतें पिछले दो वर्षों से नहीं बढ़ाई गई हैं। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा कीमतें बढ़ाने का आश्वासन देने के बावजूद कटौती करना किसानों के साथ विश्वासघात है। राज्य में बढ़ सकती है बेरोजगारी की समस्या एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि इतना बड़ा फैसला किसान संगठनों से बिना किसी परामर्श के लिया गया है, जो प्रशासनिक पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है। संगठन ने चेतावनी दी है कि ऐसे निर्णय युवाओं का मनोबल तोड़ सकते हैं और राज्य में बेरोजगारी की समस्या को और गंभीर बना सकते हैं। PDFA ने मुख्यमंत्री से की चार मांगे PDFA ने मुख्यमंत्री से चार प्रमुख मांगें की हैं। इनमें दूध की कीमतों में की गई 20 रुपए प्रति फैट कटौती को तुरंत वापस लेना, मौजूदा महंगाई और उत्पादन लागत के अनुरूप दूध की कीमतें तय करना, जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर पंजाब में खुले पनीर की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर केवल पैक्ड पनीर बेचने की अनुमति देना, और इन मुद्दों के स्थायी समाधान के लिए PDFA प्रतिनिधियों के साथ तत्काल आधिकारिक बैठक बुलाना शामिल है।


