दूसरों के रोग दूर होने की कामना लेकर माला फेरना भी धर्म ध्यान है: भावसागर

कम्युनिटी रिपोर्टर | भिलाई श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर वैशाली नगर में मुनि धर्मसागर और मुनि भाव सागर महाराज के सानिध्य में सोमवार को आचार्य विद्यासागर महाराज का 55वां आचार्य पद आरोहण स्मृति महोत्सव चौथे चरण में मनाया गया। इसके बाद मुनियों ने रायपुर की ओर विहार कर लिया है। इससे पहले मंदिर में भगवान का महामस्तकाभिषेक किया गया। आचार्य श्री के छायाचित्र पर भक्तों ने दीप जलाए। इसके बाद श्रीफल देकर मुनियों का आशीर्वाद लिया। मुनिराज धर्म सागर के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्रदीप, प्रमोद, अरुण, अक्षत, सुनीता, आशा, दीक्षा जैन बाकलीवाल, सुयश परिवार को मिला। धर्मसभा में मुनि भावसागर ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान है, जहां पर आचार्य विद्यासागर महाराज के चरण चिह्न स्थापित करवाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। आचार्यश्री ने प्रतिभास्थली के माध्यम से बालिकाओं को शिक्षा और संस्कार दिए। उनके द्वारा रचित मूकमाटी पढ़कर विदेशी लोगों ने भी मांसाहार का त्याग किया था। आचार्य ने कहा कि दूसरों के रोग दूर होने की कामना के साथ माला फेरना भी धर्म ध्यान है। भवसागर सागर महाराज का पाद प्रक्षालन किशोर जैन ने किया।

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