जैसलमेर में बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। विभाग ने शनिवार को देगराय ओरण इलाके के लखमना व लुणेरी तालाब के किनारे सोडियम हाइपोक्लोराइट केमिकल का छिड़काव किया। वहीं इसी इलाके में एक चिंकारा हिरण भी मृत मिला। वन विभाग व पशुपालन की टीम ने मृत चिंकारा का पोस्टमॉर्टम कर शव को जलाया। वहीं इलाके में बर्ड फ्लू को लेकर इसके फैलाव को रोकने के लिए तालाबों के किनारे केमिकल का छिड़काव कर बर्ड फ्लू की रोकथाम के प्रयास शुरू किए गए ताकि ये बीमारियां अन्य पक्षियों या पशुओं में ना फैले। वन पाल ललित दान ने बताया कि- देगराय ओरण इलाके में सबसे पहले बर्ड फ्लू के कारण मृत कुरजां पक्षी पाए गए थे। इस इलाके में अभी भी हजारों की संख्या में कुरजां पक्षी विचरण कर रहे हैं। ऐसे में वन विभाग व पशुपालन विभाग जैसलमेर की टीम ने तालाबों के किनारे सोडियम हाइपोक्लोराइट केमिकल का छिड़काव किया। इस दौरान वन पाल ललित दान, सहायक वन पाल चंदन सिंह, केसरा राम, वन रक्षक अशोक कुमार, चौकीदार जालम सिंह व जोगराज सिंह सावता मौजूद रहे। हिरण का पोस्टमॉर्टम किया, रिपोर्ट के बाद होगा खुलासा पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉक्टर उमेश व्रंगतिवार ने बताया कि देगराय ओरण इलाके में शनिवार को एक चिंकारा हिरण कि मौत हुई है। हालांकि वो संक्रमित इलाके से काफी दूर मिला है। उसकी मौत नॉर्मल ही है। मृत चिंकारा हिरण का जैसलमेर पशु हॉस्पिटल में पोस्टमॉर्टम कर उसके शव का अंतिम संस्कार किया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा। अब तक 32 कुरजां पक्षी के मिले शव गौरतलब है कि जैसलमेर जिले में 11 जनवरी से लेकर शनिवार, 18 जनवरी तक 32 कुरजां पक्षियों की मौत हो चुकी है। भोपाल भेजे सैंपल रिपोर्ट में कुरजां पक्षियों में बर्ड फ्लू की बीमारी का खुलासा हुआ था। इसके बाद से जिला प्रशासन अलर्ट होकर बीमारी की रोकथाम को लेकर प्रयास कर रहा है। मगर लगातार मिल रहे मृत कुरजां पक्षियों के शव से सभी चिंतित है। जिले में बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद से पशुपालक भी काफी परेशान है।


