देवभोग का मामला:छत्तीसगढ़ से मंजूरी लिए बिना ओडिशा के ठेकेदार ने खड़ा किया 3 करोड़ का पुल, सड़क भी बना दी

गरियाबंद जिले में देवभोग ब्लॉक के आखिरी छोर पर बसे दीवानमुड़ा के बगल से बरही नाला बहता है। इसके उस पार ओडिशा राज्य का भोजपुर इलाका है। इन दो गांवों को जोड़ने के लिए 3 करोड़ का एक पुल और सड़क भी बनाई गई है। ओडिशा सरकार की ओर से किए गए इस काम के लिए छत्तीसगढ़ से कोई मंजूरी नहीं ली गई है। ठेकेदार ने मनमर्जी से निर्माण कर दिया है, जबकि ऐसे ही मामले में छत्तीसगढ़ की ओर से बनाए जा रहे 5 करोड़ के नाले पर ओडिशा सरकार ने यह कहकर रोक लगा दी थी कि नाला उनके इलाके से गुजरेगा। मंजूरी नहीं मिलेगी। इसके चलते देवभोग में सिंचाई के लिहाज से महत्वपूर्ण 70 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत वाली उरमाल जलप्लावन योजना बर्बाद हो गई है। दरअसल, बरही नाले पर ओडिशा प्रशासन 3 करोड़ से अधिक लागत का 66 मीटर लंबा उच्च स्तरीय पुल बिना अनुमति के छत्तीसगढ़ राजस्व भूमि पर बना रहा है। यह पुल दीवानमुड़ा-भोजपुर को जोड़ेगा। नाले का आधा भू-भाग छत्तीसगढ़ के राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर 131 में दर्ज है, जबकि 33 मीटर पक्का निर्माण और 30 मीटर लंबा एप्रोच रोड भी छत्तीसगढ़ में आता है। ठेकेदार ने दो बड़े पिलर खड़े कर 22 मीटर लंबी स्लैब ढाल दिया है और 30 मीटर एप्रोच रोड का काम भी तेजी से पूरा कर लिया है। ग्राम पंचायत से गुपचुप मंजूरी लेकर किया काम जयपुर की वासुदेव कंस्ट्रक्शन कंपनी ने पुल निर्माण से पहले दीवानमुड़ा ग्राम पंचायत के तत्कालीन सरपंच कंचन कश्यप से फरवरी 2023 में अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया। यह प्रमाण पत्र निजी भूभाग के उत्तराधिकारी सरपंच की ओर से दिया गया था। हालांकि, नियम के अनुसार इसे पंचायत प्रस्ताव में शामिल करना जरूरी था। कंचन कश्यप ने बताया कि इलाके में पक्के पुल निर्माण के लिए सभी की सहमति थी। वर्तमान में यह मामला जांच के दायरे में है कि अनापत्ति प्रमाण पत्र व्यक्तिगत था या ग्राम पंचायत की स्वीकृति के तहत जारी किया गया। ओडिशा ने सिंचाई योजना रोकी 2015 में तेल नदी के एनासर घाट पर 130 मीटर लंबा एनीकेट वाल निर्माण हो रहा था। यह वाल उरमाल जलप्लावन योजना के तहत सिंचाई सुविधा के लिए बनाया जा रहा था। निर्माण के दौरान नवरंगपुर जिला प्रशासन ने नदी के आधे भाग को ओडिसा के अधिपत्य में मानते हुए काम रोक दिया। इससे 5 करोड़ की परियोजना प्रभावित हुई और 70 करोड़ की योजना स्थगित हो गई। एनीकेट से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि ओडिसा के लोग भी लाभान्वित होने वाले थे। प्रशासन ने सीमा की औपचारिकताओं के कारण जनहित की अनदेखी की थी। आधा निर्माण छत्तीसगढ़ के हिस्से में हल्का पटवारी से परीक्षण करवाया गया है। खसरा नंबर 131 में नाले का आधा हिस्सा छत्तीसगढ़ के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। खसरा 128/1 दीवानमुड़ा किसान संतोष कश्यप के नाम पर है। ठेकेदार ने बिना मंजूरी दो पिलर खड़े कर दिए। अवैधानिक निर्माण रोकने नोटिस जारी किया है। ठेका कंपनी ने ग्राम पंचायत का प्रमाण पत्र दिया है। यह अन्य राज्य में पक्के निर्माण के लिए नाकाफी है। अब निर्माण स्थगन के लिए कार्रवाई की जाएगी। – अजय चंद्रवंशी, तहसीलदार देवभोग

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *