देश के रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा, मेरा दुर्भाग्य था कि मैं एनसीसी कैडेट था, किंतु भारतीय फौज का हिस्सा नहीं बन पाया। आज तक यह पीड़ा मेरे जीवन में चुभती है। भारतीय फौज दुनिया की सबसे शक्तिशाली और आत्मनिर्भर सेना है, और यदि आप उसका हिस्सा नहीं बन पाए, तो इसका मतलब है कि आप सीधे तौर पर मां भारती की सेवा नहीं कर पाए। केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ शुक्रवार उज्जैन आए। यहां वे एनसीसी कैडेट्स से रूबरू कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा, “मैं हमारे प्यारे और न्यारे तिरंगे की रक्षा में शामिल नहीं हो सका। मैं हर जगह कहता हूं कि मेरा अगला जन्म भारत भूमि पर ही हो। यदि जन्म भारत भूमि पर होगा, तो मुझे भारतीय फौज का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूं।” “दुनिया का शक्तिशाली और अनुशासित संगठन एनसीसी” रक्षा राज्यमंत्री सेठ ने कहा, भगवान महाकाल के सानिध्य में इस पवित्र भूमि पर आने का मेरा सौभाग्य रहा। आज सैकड़ों एनसीसी कैडेट्स से मेरी चर्चा हुई। दुनिया का सबसे बड़ा, शक्तिशाली और अनुशासित संगठन एनसीसी कैडेट्स का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद एक एनसीसी कैडेट रहे हैं। जब प्रधानमंत्री की कैडेट के रूप में फोटो सोशल मीडिया पर आई, तो देश के युवा उत्साहित हो गए। कहा जाने लगा कि दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता एक एनसीसी कैडेट रहा है। इसके बाद युवाओं में इस संगठन में शामिल होने की होड़ लग गई। तभी प्रधानमंत्री का निर्देश हुआ कि 17 लाख एनसीसी कैडेट्स की संख्या बढ़ाकर 20 लाख की जाएगी। उन्होंने कहा, “एनसीसी कैडेट होना ही एक आत्मगौरव की बात है, क्योंकि यह मां भारती की सेवा का प्रतीक है। एनसीसी कैडेट्स में अनुशासन कूट-कूट कर भरा होता है और यह देशभक्ति और राष्ट्र प्रेम को जागृत करता है। मैं यहां बच्चों से मिलने और उन्हें भारतीय फौज का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करने आया हूं।”


