भास्कर न्यूज | गढ़वा मौसम के अचानक बदले मिजाज ने जिले में जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। मंगलवार को जिले का न्यूनतम तापमान गिरकर 7.07 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ठंड के साथ-साथ पूरे दिन आसमान में घने बादल छाए रहने के कारण सूर्य का दर्शन नहीं हो सका, जिससे ठिठुरन और बढ़ गई। सुबह से ही शीतलहर जैसी स्थिति बनी रही और ठंडी हवाओं ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया। आम दिनों की तुलना में सुबह के समय बाजारों और सड़कों पर आवाजाही काफी कम देखने को मिली। जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोग गर्म कपड़ों, जैकेट, टोपी और मफलर में पूरी तरह लिपटे नजर आए। अत्यधिक ठंड का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ा। दिन भर धूप नहीं निकलने के कारण ठंड का असर और गहरा हो गया, जिससे दोपहर के समय भी ठंड का अहसास बना रहा। डॉ. पतंजलि केसरी ने कहा कि ठंड में कम उम्र के बच्चों वृद्ध व्यक्तियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इस तरह के मौसम में दोनों ही लोग प्रभावित होते हैं उन्होंने कहा कि ठंड को देखते हुए लोगों को अपने खान-पान पर भी ध्यान देना चाहिए। चौक-चौराहों पर जला अलाव ठंड से बचाव के लिए शहर के चौक-चौराहों, बाजारों और मोहल्लों में लोगों ने अलाव का सहारा लिया। जगह-जगह अलाव जलते देखे गए, जहां लोग हाथ सेंकते और ठंड से राहत पाने की कोशिश करते नजर आए। गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए अलाव ही ठंड से बचने का मुख्य सहारा बना रहा। ठंड बढ़ने से दैनिक जीवन पर भी असर पड़ा है। सुबह जल्दी खुलने वाली दुकानें देर से खुलीं, वहीं शाम ढलते ही बाजारों में सन्नाटा पसर गया। लोग बेवजह घर से बाहर निकलने से बचते रहे। ग्रामीण इलाकों में भी हालात कुछ ऐसे ही रहे। खेतों और खुले स्थानों में काम करने वाले मजदूरों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा, जिससे उनके कामकाज पर भी असर देखने को मिला।


