प्रदेश के इकलौते अम्बेडकर अस्पताल के एडवांस हार्ट इंस्टीट्यूट में बाईपास सर्जरी एक सप्ताह के अंदर शुरू हो जाएगी। एक महीने से वेंडर के भुगतान की संचालनालय में पड़ी फाइल पास होकर अस्पताल पहुंच गई। इसमें सर्जरी के लिए लगने वाले रीजेंट की भी एनओसी मिल गई है। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो दो-तीन दिन के अंदर वेंडर्स का भुगतान हो जाएगा। बता दें कि बाईपास सर्जरी के लिए लगने वाले इंप्लांट की सप्लाई करने वाले वेंडर्स का दो साल से पेमेंट नहीं हुआ था। इस वजह से 6 महीने पहले उन्होंने सामान देने से मना कर दिया। जिसकी वजह से पिछले चार महीने बाईपास सर्जरी रूक गई थी। इसमें इंतजार करते-करते दो महिलाओं की मौत हो गई। इस खबर को भास्कर ने प्रमुखता से 16 अप्रैल के अंक में उठाया। स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल की सुविधाओं को लेकर ली बैठक स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मंत्रालय में अम्बेडकर अस्पताल की सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार को लेकर बैठक ली। इसमें मंत्री ने निर्देश दिए कि चिकित्सालय में आवश्यक सभी चिकित्सा उपकरण, तकनीकी संसाधन, और मरीजों की सुविधाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए। बाईपास सर्जरी के लिए जो भी सामान चाहिए, वह भी उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि अस्पताल में विस्तारीकरण और विद्युतीकरण के कार्यों में विभागीय समन्वय मजबूत किया जाए, ताकि निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण परिणाम प्राप्त हो सकें। एम्स से आए मरीज की मौत
65 साल की त्रिवेणी बाई के फेफड़े में पानी भर गया था। वाल्व खराब होने की वजह से हार्ट कमजोर हो गया था। इस वजह से फेफड़े और शरीर पानी में भर जाता था। सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उनका इलाज एम्स रायपुर में चल रहा था। वहां मरीजों की संख्या अधिक होने की वजह से उन्हें अम्बेडकर अस्पताल भेजा दिया गया। यहां 25 दिन वे वार्ड में भर्ती रहीं। हर दिन पूछती मेरा ऑपरेशन कब होगा। लेकिन उन्हें एक ही जवाब मिलता जल्द। यह सुनते-सुनते एक दिन वे दुनिया छोड़कर ही चली गईं। इंतजार में चली गई जान
नवा रायपुर की रहने वाली सती बाई यादव की मौत ऑपरेशन के इंतजार में हो गई। वॉल्व में लीकेज से वे अगस्त 2024 से अस्पताल के चक्कर काट रही थी। पति यशवंत बताते हैं कि हर बार ऑपरेशन की डेट दी जाती, लेकिन जब जाते तो फिर नई डेट दे दी जाती। बताया जाता कि सामान नहीं है। हम इंतजार करते रहे कि एक दिन सामान आएगा और ऑपरेशन होगा। वह महज 36 साल की थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने मेरी पत्नी की जिंदगी लील ली। एक दिन आया और उसकी धड़कन रूक गई।


