दो संतों का मिलन; सांगानेर दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान में बही धर्म व संस्कृति की ब्यार

श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर में आचार्य सुंदर सागर व आचार्य शंशाक सागर महाराज ससंघ का पदार्पण हुआ। संतों के मिलन के मौके पर आस-पास का क्षेत्र श्रद्धा व आस्था के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। संस्थान की ओर से निदेशक डॉ. शीतलचंद जैन, सह निदेशक प्रो. अरुण कुमार जैन, कार्याध्यक्ष प्रमोद पहाडिया, उपाध्यक्ष महावीर प्रसाद बज, मंत्री सुरेश जैन, कासलीवाल अधिष्ठात्री शीला डोड्या संयुक्त मंत्री दर्शन कुमार जैन व संस्थान परिवार ने श्रीफल अर्पित कर पद प्रच्छालन किया। श्रमण संस्कृति संस्थान के योगदान को किया रेखांकित आचार्य विद्या-सुधा सभा मंडप में आयोजित धर्मसभा में आचार्य सुंदर सागर ने भारतीय संस्कृति एवं महत्वपूर्ण अंग श्रमण संस्कृति, धर्म और साहित्य के संरक्षण में श्रमण संस्कृति संस्थान के योगदान को रेखांकित किया। साथ ही संस्थान के आशीष प्रदाता आचार्य विद्या सागर महाराज और संस्थान संप्रेरक निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव सुधा सागर महाराज के त्याग, तपस्या की को याद करते हुए कहा कि उनके आशीर्वाद से संस्थान में हो रहे लोकोपकारी शिक्षा और संस्कारों की चेतना जागृति के कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपने कर्मों को काटने के लिए धर्म का ज्ञान करना आवश्यक है और उसे धर्म को चरित्र के रूप में अंगीकार करना श्रेष्ठ है। बिना चरित्र के मोक्ष प्राप्त नहीं हो सकता। आचार्य शंशाक सागर ने कहा कि संस्थान की भूमि की महिमा अद्भुत है। यहां मैंने मात्र छह माह अध्ययन किया और मेरा मन दीक्षा धारण का बन गया। सभा के बाद संस्थान में संचालित संत सुधासागर आवासीय कन्या महाविद्यालय परिसर में महाविद्यालय की अधिष्ठात्री शीला डोड्या, उपाध्यक्षा नीना पहाड़िया, प्राध्यापक, प्राध्यापिकाओं तथा छात्र-छात्राओं ने पूरे मुनिसंघ एवं आर्यिका संघ की आहार चर्या का पुण्य लाभ अर्जित किया।

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