विशेष संवाददाता | रांची झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को एक आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान एक कैदी के न्यायिक हिरासत में रहते हुए एचआईवी संक्रमित होने पर सख्त रुख अपनाया। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत ने जेल में बंद कैदी के एचआईवी संक्रमित होने पर गंभीर टिप्पणी की। कहा, यह जेल प्रशासन की घोर लापरवाही दिखाता है। अदालत ने कहा कि यह सिर्फ चिकित्सीय त्रासदी ही नहीं, बल्कि मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन भी है। अदालत ने जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों का लोड, कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं और कैदियों की नियमित स्वास्थ्य जांच में लापरवाही को भी गंभीर मुद्दा माना। अदालत ने कहा कि यह सिर्फ एक कैदी की समस्या नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि राज्य की जेलों में स्वास्थ्य और सुरक्षा के मानक कमजोर हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और तंत्र को सुधार के ठोस कदम उठाने होंगे। अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई में स्वास्थ्य विभाग के सचिव, गृह सचिव, धनबाद व हजारीबाग केंद्रीय कारा के जेल अधीक्षक और मेडिकल ऑफिसर को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत ने धनबाद जिला जेल में 2 जून 2023 से 24 अगस्त 2024 तक रहे सभी कैदियों की मेडिकल जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। मालूम हो कि कैदी 2 जून 2023 से जेल में बंद है। वह पहले धनबाद जिला जेल में था। 10 अगस्त 2024 को उसे हजारीबाग केंद्रीय कारा में शिफ्ट किया गया था। 24 जनवरी 2024 को जांच के बाद वह एचआईवी पॉिजटिव पाया गया था।


