रांची | नगड़ी की जमीन बचाने को लेकर 9 जून 2012 में हुए जनआंदोलन मामले में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, विधायक अरूप चटर्जी, पूर्व सांसद सालखन मुर्मू, पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह, समाजसेवी दयामनी बारला सहित कुल 10 आरोपियों को अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। यह फैसला सोमवार को एमपी/एमएलए के विशेष न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत ने सुनाई है। अदालत ने 8 सितंबर को बहस बंद होने के बाद फैसले की तारीख 15 सितंबर तय की थी। मामले में उक्त पांच के अलावा नंदी कच्छप, किशोर महतो, राजेंद्र महतो, सज्जाद अंसारी एवं समनुर मंसूरी को अदालत ने बरी किया। नगड़ी जमीन अधिग्रहण के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन हुआ था। आंदोलनकारियों ने राजभवन का घेराव किया था, जिसके बाद 27 लोगों पर 2012 में कोतवाली थाना में कांड संख्या 609/2012 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में बंधु तिर्की समेत 10 आरोपियों पर 12 जुलाई 2022 को आरोप तय किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 6 चार्जशीटेड गवाहों में से 5 को अदालत में पेश किया, लेकिन अनुसंधानकर्ता अधिकारी मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण गवाही दर्ज नहीं कर पाए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।


