दाऊदी बोहरा समाज के धर्म गुरु डॉ. सैय्यदना आली कदर मुफद्दल सैफुद्दीन ने संदेश दिया कि बच्चे मोबाइल की लत का शिकार नहीं हों, अभिभावक इसका ध्यान रखें। बच्चों को मोबाइल एडिक्शन से बचाने दिए संदेश पर अशोकनगर दाऊदी बोहरा समाज ने अमल किया। हर वक्त मोबाइल में लगे रहने वाले बच्चों की ये लत अब छूट चुकी है। इसके लिए उनके पैरेंट्स को थोड़ा समय बच्चों के लिए निकालना पड़ा। पहले उन्होंने बच्चों के सामने खुद मोबाइल चलाना छोड़ा और उनके साथ इंडोर व आउट डोर एक्टिविटीज की, जिसका परिणाम है कि अब बच्चे मोबाइल को हाथ ही नहीं लगा रहे। दाऊदी बोहरा समाज के खजांची युसुफ अली ने बताया कि अशोकनगर में दाऊदी बोहरा समाज के 18 परिवार रहते हैं। धर्मगुरु द्वारा दिए संदेश के बाद 90% बच्चों ने मोबाइल चलाना बंद कर दिया है। हम समाज में अपडेट भी लेते रहते हैं। ऐसे ही दो परिवारों की कहानी उनकी जुबानी.. खुदने छोड़ा अब बच्चे के साथ गेम्स भी खेलते हैं धर्मगुरु के संदेश को दिखाया फिर खुद बच्चों के सामने मोबाइल चलाना छोड़ा, समाज प्रमुख लेते हैं अपडेट मोबाइल नहीं अब अपनों के साथ समय बिताते हैं… मोबाइल ने बनाई दूरियां जहरा और रुकैया दोनों आपस में बहनें हैं और वे भी मोबाइल चलाती थी, लेकिन अब उनकी मोबाइल की लत भी छूट चुकी है। वे बताती हैं कि पहले मोबाइल चलाते थे लेकिन धर्मगुरु के संदेश पर मोबाइल अब नहीं चलाते। उसकी जगह फिजिकल एक्टिविटीज पर ज्यादा ध्यान देते हैं। जितना बड़ा मोबाइल, उतना बड़ा बम
7 साल का मुफद्दल सैफी कक्षा 2 में पढ़ता है। उसे मोबाइल चलाने की इतनी लत लग गई थी कि स्कूल से आते ही सीधे मोबाइल चलाने लगता था। खाना खाते समय भी उसके हाथ में मोबाइल रहता था। देर रात तक टीवी देखता रहता था। उसकी मां निसरीन सैफी ने बताया कि पहले तो उसे धर्मगुरु का संदेश दिखाया था। इसके बाद पहले हम दोनों ने मोबाइल उसके सामने चलाना छोड़ा। उसके साथ टाइम स्पेंड किया। उसके साथ बिजनेस खेलना शुरू किया, ड्राइंग करना उसे पसंद है वह कराई। जैसे ही उसके पिता बुरहाउद्दीन सैफी घर आते हैं उनके साथ क्रिकेट खेलता है। अब ये स्थिति है कि कॉल आने पर भी नहीं उठाता। इस संबंध में मुफद्दल सैफी से बात की तो उसने बताया कि मोबाइल में बम होता है, जितना बड़ा मोबाइल उतना बड़ा बम। मैं पहले चलाता था मोबाइल अब नहीं चलाता।


