महासमुंद| धान खरीदी के अंतिम तिथि तक महासमुंद जिले के लगभग 9600 किसान अपना धान नहीं बेच पाए है। इस पर पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर का कहना है कि सरकार खानापूर्ति के िलए महज 2 दिन की अवधि बढ़ाकर वाहवाही लूटा। किसानों के बिना जानकारी उनका रकबा समर्पण कराया गया। एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन और टोकन के नाम पर किसानों को परेशान किया गया। कई किसान सरकार की बदनीयती के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठाने तक मजबूर हो गए। 2 दिन पूर्व ही िपथौरा वनांचल क्षेत्र कौहाबाहरा की एक महिला किसान ने धान नहीं बिक पाने के कारण जहर सेवन कर लिया। सरकार ने सोची-समझी रणनीति के तहत किसानों को धान बेचने से वंचित किया है। जिले में हजारों किसानों का लगभग 30 हजार एमटी धान अब भी नहीं बिक पाया है। ऐसे में सरकार द्वारा मात्र दो दिन की खरीदी अवधि बढ़ाना किसानों के साथ मजाक था। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में किसानों के हित में काम करना चाहती तो कम से कम 15 दिनों का अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए था, ताकि सभी किसानों का धान खरीदा जा सके।


