भगवा पार्टी (भारतीय गणवार्ता पार्टी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकांत शुक्ला गुरुवार को अपने समर्थकों के साथ धार की ऐतिहासिक भोजशाला पहुंचे। उन्होंने यहां मां सरस्वती के स्थान का अवलोकन किया। परिसर से बाहर आकर शुक्ला ने कहा कि यह स्थल राजा भोज द्वारा मां सरस्वती की स्थापना के लिए बनाया गया था और यह भारतीय सभ्यता व संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रतीक है। शुक्ला ने दावा किया कि अंग्रेजों से राजनीतिक आजादी के बाद देश को स्वतंत्र माना गया, लेकिन भोजशाला की वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि सांस्कृतिक स्तर पर स्वतंत्रता अब भी अधूरी है।़ 23 जनवरी से संघर्ष का नया चरण शुरू होगा
उन्होंने देवी-देवताओं, सनातन संस्कृति, सभ्यता और भारत के इतिहास की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष की आवश्यकता पर जोर दिया। शुक्ला ने इसे केवल धार्मिक मुद्दा न बताकर सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा प्रश्न बताया। भगवा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने घोषणा की कि इस संघर्ष का नया चरण 23 जनवरी से शुरू होगा। आंदोलन की शुरुआत प्रदेश की राजधानी भोपाल से की जाएगी और इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार से सहयोग मांगा
शुक्ला ने कहा कि मेरी ब्रिटिश सरकार अपील है कि भोजशाला से ले जाई गई वाग्देवी मां सरस्वती की प्रतिमा को ससम्मान भारत लौटाया जाए और उसे मूल स्थान पर पुनः स्थापित किया जाए। उन्होंने इस मांग को ऐतिहासिक न्याय और सांस्कृतिक सम्मान से जुड़ा बताया। शुक्ला ने केंद्र और राज्य सरकार से भी इस अभियान में सहयोग की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि यह प्रयास सुनियोजित और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि भारतीय संस्कृति और धरोहरों को उनका गौरव वापस मिल सके।


