नक्सली कैंप में गुरिल्ला ट्रेनिंग लेने वाले युवा आज बिछा रहे आईईडी

विजय सिंह| आनंदपुर जिले के कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगलों में पिछले साल माओवादियों द्वारा एक बड़ा ट्रेनिंग कैंप चलाया गया था, जिसमें कई युवाओं को पी.टी से लेकर आधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गई थी। संगठन द्वारा सोशल मीडिया में छोड़े गए वीडियो क्लिप में दिखाया गया है कि घने जंगलों में किस प्रकार से ट्रेनिंग ले रहे हैं। इधर विश्वसनीय सूत्रों से पता चला कि पिछले साल टोंटो थाना क्षेत्र के गुलगुलदा पहाड़ी पर माओवादियों का एक बहुत बड़ा ट्रेनिंग कैंप चलाया गया था। जहां 15 से 25 साल के लगभग 80 की संख्या में लड़के और लड़कियों को संगठन में भर्ती करने के लिए करीब दो से तीन माह तक गुरिल्ला ट्रेनिंग दी गई थी। ये अचरज करने वाली बात नहीं है, क्योंकि नक्सलियों का यह पहला ट्रेनिंग सेंटर नहीं था। इससे पहले भी माओवादियों के हेड क्वार्टर रहे सारंडा के बिटकीलसोया व थोल्कोबाद के जंगलों में माओवादी युवाओं को संगठन में भर्ती करने के लिए ट्रेनिंग कैंप चलाया करते थे। जहां युवकों को बोर्ड पर आधुनिक हथियार एके 47 का चित्र बनाकर उसके बारे में बताया करते थे। हलांकि फोर्स द्वारा अभियान के दौरान ट्रेनिंग कैंप को ध्वस्त कर दिया गया है। बड़ी आसानी से ट्रेनिंग कैंप में ट्रेंड हुए 15 से 25 साल तक के युवकों का नक्सली दस्ता फोर्स को नुकसान पहुंचाने के लिए आईडी प्लांट करता है। छोटे होने के कारण फोर्स का ध्यान इन पर नहीं जाता है। जिससे इन्हें आसानी से बम प्लांट का मौका मिल जाता है। अधिकतर बम प्लांट की जिम्मेवारी गुरिल्ला ट्रेनिंग के दस्ते को दी जाती है। महिला नक्सली करती हैं सांस्कृति कार्यक्रम : इधर युवतियां भी इसी दस्ते के साथ ट्रेनिंग लेती हैं, लेकिन इनका पहला काम नक्सली कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर उसे सफल बनाना होता है। इस दस्ते का काम नाच-गान के माध्यम से संगठन का विस्तार करना, हौसला बढ़ाना, मारे गए माओवादियों को श्रद्धांजलि देना आदि कार्य है। समय-समय पर महिला नक्सली भी कई मामलों में शामिल रहती हैं। माओवादी भी हर मामले में सजग रहते हैं, वह किसी को भी संगठन में यूं भर्ती नहीं करते हैं। ट्रेनिंग से पहले युवाओं को जन मिलीसिया दस्ता में शामिल होना पड़ता है। मिलीसिया दस्ते का काम संगठन को फोर्स का मूवमेंट की सूचना देना, राशन उपलब्ध आदि कराना होता है। इसके बाद मिलीसिया दस्तों को दो या तीन माह का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस दौरान दस्ते को रोजाना 20 दिनों तक 30 मिनट तक पी.टी (सुबह का व्यायाम) कराया जाता है। इनकी भी ट्रेनिंग किसी फोर्स से कम नहीं होती है। बीस दिनों के बाद दस्ते को हथियार चलाने की ट्रेनिंग के साथ-साथ आईडी प्लांट करने का भी प्रशिक्षण दिया जाता जाता है।

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