पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने टिहरी जनपद के प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां सुरकंडा देवी मंदिर में तीन दिवसीय पूजा-अर्चना की। यह उनका इस मंदिर का दूसरा दौरा था, जहां उन्होंने घंटों ध्यान-साधना भी की। सिद्धू 26 जुलाई को पर्यटक स्थल काणाताल स्थित एक निजी होटल पहुंचे थे। इसके बाद, उन्होंने 27, 28 और 29 जुलाई को दोपहर बाद प्रतिदिन मां सुरकंडा मंदिर का दौरा किया। खराब मौसम के कारण रोप-वे सेवा बाधित होने के बावजूद, वे पैदल ही मंदिर पहुंचे और रोजाना करीब तीन घंटे ध्यान साधना की। उन्होंने सुरकंडा सिद्धपीठ को आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र बताया, जहां मन को असीम शांति और सुकून मिलता है तथा शक्ति का संचार होता है। सिद्धू ने कहा कि यही कारण है कि उनका मन बार-बार यहां आने को करता है। उनका यह दौरा पूरी तरह निजी था और वे बिना किसी प्रोटोकॉल के एक आम भक्त की तरह मंदिर आए। रास्ते में यात्रियों के साथ उन्होंने तस्वीरें भी खिंचवाईं। तीन दिवसीय पूजा-अर्चना के बाद, सिद्धू 30 जुलाई को अपने घर के लिए रवाना हो गए। मंदिर से वापसी के समय, पुजारी रमेश प्रसाद लेखवार और मैती रणजीत सिंह जड़धारी ने उन्हें माता की चुनरी और प्रसाद भेंट किया। सिद्धू ने कहा कि पूरा उत्तराखंड देवभूमि है, लेकिन यह स्थान विशेष है। इससे पहले, नवजोत सिंह सिद्धू जून माह के पहले सप्ताह में भी यहां आए थे और तब भी उन्होंने तीन दिन तक मंदिर में पूजा की थी। तब उन्होंने कहा था कि वह जल्दी ही दोबारा मंदिर में आएंगे। मंदिर समिति के प्रबंधक रघुभाई जड़धारी ने बताया कि मां सुरकंडा मंदिर प्रमुख सिद्धपीठों में से एक है, इसकी मान्यता व महात्मय का वर्णन केदारखंड में भी उल्लेखित है, इसलिए बड़े-बड़े सेलिब्रिटी भी यहां मां के दर्शनों को आते रहते हैं।


